25 Apr 2026, Sat

घटिया लाइनिंग, बिना सुरक्षा इंतज़ाम—खड़गवां में कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा

मौत का खुला न्योता बनी अंजनी जलाशय की नहर

खड़गवां। किसानों की सिंचाई और क्षेत्रीय विकास की उम्मीद बनकर बनी से निकली नहर आज प्रशासनिक लापरवाही, घटिया निर्माण और जवाबदेही के अभाव की भयावह मिसाल बन चुकी है। जिस नहर से हरियाली की राह खुलनी थी, वही अब ग्रामीणों के लिए मौत का रास्ता साबित हो रही है। हालात इतने खतरनाक हैं कि ग्रामीण बेबाक कहते हैं—“यह नहर नहीं, हादसे का इंतज़ार है।”

घटिया निर्माण की खुली पोल

नहर की लाइनिंग में गंभीर अनियमितताएं साफ नजर आ रही हैं। कई स्थानों पर निर्माण अधूरा छोड़ा गया है, दीवारों में दरारें हैं और संरचना कमजोर दिखाई देती है। ढलान इतनी तीखी है कि ज़रा सा संतुलन बिगड़ा और सीधे नीचे गिरने का खतरा। यह सब दर्शाता है कि गुणवत्ता मानकों को ताक पर रखकर काम किया गया। सवाल यह है—क्या काम सिर्फ कागज़ों में ही पूरा दिखाया गया?

30 फीट गहराई: एक चूक, सीधी मौत

स्थानीय लोगों के अनुसार नहर की गहराई करीब 30 फीट तक है। किनारों पर न सुरक्षा दीवार, न रेलिंग, न बैरिकेडिंग। ऐसी स्थिति में किसी के गिरने पर बचाव की संभावना लगभग शून्य है। यह नहर अब ग्रामीणों और मवेशियों के लिए खुला मौत का कुआं बन चुकी है।

न चेतावनी, न रोशनी—हादसे का खुला न्योता

सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि कहीं भी चेतावनी बोर्ड नहीं लगे हैं, न सुरक्षा संकेत और न ही पर्याप्त लाइटिंग। रात में पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है। यह लापरवाही नहीं, बल्कि सीधे तौर पर लोगों की जान से खिलवाड़ है।

डर के साए में जीते ग्रामीण

नहर के आसपास रहने वाले परिवार हर दिन भय में जी रहे हैं। बच्चों को नहर से दूर रखना चुनौती बन गया है, बुजुर्गों के लिए रास्ता पार करना जोखिम भरा है और मवेशियों के गिरने की आशंका हमेशा बनी रहती है। बरसात में फिसलन इस खतरे को कई गुना बढ़ा देती है।

प्रशासन और ठेकेदार पर तीखे सवाल

  • क्या निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार हुआ?
  • क्या बिना समुचित जांच के भुगतान कर दिया गया?
  • क्या जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ फाइलों तक सीमित रह गए?
  • अगर कोई बड़ा हादसा हुआ तो जवाबदेही किसकी होगी?

ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, सख्त मांग

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है—
नहर किनारों पर मजबूत बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड और पर्याप्त लाइटिंग की व्यवस्था की जाए।
घटिया निर्माण की उच्चस्तरीय जांच हो और दोषी अधिकारियों व ठेकेदारों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

हादसे से पहले जागे सिस्टम

में अंजनी जलाशय की यह नहर अब टाइम बम बन चुकी है। हर दिन, हर पल यहां बड़ी दुर्घटना का खतरा मंडरा रहा है। अगर प्रशासन अब भी नहीं जागा, तो आने वाला हादसा सिर्फ एक घटना नहीं होगा—यह सरकारी लापरवाही की ऐसी कहानी बनेगा, जिसे नज़रअंदाज़ करना संभव नहीं होगा।

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