
कोरिया जिले खरवत के खरवत क्षेत्र में अवैध जुए का कारोबार बेखौफ और धड़ल्ले से जारी है। हालात ऐसे हैं कि यह गैरकानूनी गतिविधि अब छिपी नहीं रही, बल्कि खुलेआम सार्वजनिक स्थानों, खेत-खलिहानों और सुनसान इलाकों में रोजाना जुए की महफिलें सज रही हैं। इस स्थिति ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि जुआरियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें किसी प्रकार का डर नहीं रह गया है। दिन हो या रात, बड़ी रकम के दांव लगाए जा रहे हैं और बाहरी लोगों की आवाजाही भी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार, कई बार इसकी सूचना पुलिस और प्रशासन को दी गई, लेकिन मौके पर न तो नियमित गश्त दिखाई देती है और न ही कोई प्रभावी कार्रवाई। इससे लोगों के बीच यह चर्चा भी तेज हो गई है कि कहीं न कहीं इस अवैध कारोबार को मौन संरक्षण तो नहीं मिल रहा।
ग्रामीणों का कहना है कि अवैध जुए के कारण क्षेत्र में सामाजिक और आर्थिक ताना-बाना बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। कई परिवारों में घरेलू कलह बढ़ी है, आर्थिक तंगी गहराई है और मेहनत की कमाई जुए की भेंट चढ़ रही है। खासकर युवाओं पर इसका नकारात्मक असर साफ नजर आने लगा है। पढ़ाई-लिखाई और रोजगार की चिंता छोड़कर कुछ युवा इस गलत रास्ते की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जो भविष्य के लिए बेहद चिंताजनक संकेत है।
स्थानीय लोगों ने यह भी बताया कि जुए से जुड़े विवादों और झगड़ों की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे कानून-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा बना रहता है। बावजूद इसके, जिम्मेदार विभागों की ओर से ठोस कदम न उठाया जाना प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है। ग्रामीणों का मानना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो हालात और भी गंभीर हो सकते हैं।
इस मामले में जब संबंधित अधिकारियों से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, तो कोई स्पष्ट और संतोषजनक जवाब सामने नहीं आया। न ही यह बताया गया कि अब तक क्या कार्रवाई हुई है और आगे क्या कदम उठाए जाएंगे। इससे आमजन में नाराजगी और अविश्वास बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध जुए पर तत्काल और निर्णायक कार्रवाई की जाए, नियमित पुलिस गश्त बढ़ाई जाए तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएं। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस गंभीर समस्या को कितनी गंभीरता से लेता है और खरवत में चल रहे अवैध जुए के इस खेल पर कब तक प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।
