
बैकुंठपुर नगरपालिका एक बार फिर सवालों के घेरे में है। वार्ड क्रमांक 6 में घनश्याम साहू के घर से साहब तिवारी के घर तक कराए जा रहे नाली निर्माण कार्य को लेकर स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। लोगों का सीधा सवाल है—जब नाली उपयोग योग्य थी, तो उसे तोड़ने की जल्दबाजी क्यों?
स्थानीय निवासियों का कहना है कि जिस स्थान पर नई नाली का निर्माण कराया जा रहा है, वहां पहले से बनी नाली पूरी तरह चालू हालत में थी। नाली की मूल संरचना मजबूत है और केवल ऊपर लगी स्लैब कुछ जगहों पर क्षतिग्रस्त हुई थी। क्षेत्रवासियों के अनुसार, अगर केवल स्लैब की मरम्मत करा दी जाती तो नाली आसानी से दो से तीन वर्ष और सुचारु रूप से काम कर सकती थी। ऐसे में पूरी नाली को ध्वस्त कर दोबारा निर्माण कराना सरकारी धन की बर्बादी नहीं तो और क्या है?
मौके पर स्थिति का अवलोकन करने पर भी यह साफ नजर आता है कि नाली पूरी तरह जर्जर नहीं थी। इसके बावजूद नगरपालिका के तकनीकी सहायकों द्वारा बिना गहन तकनीकी मूल्यांकन के पूरे नाली निर्माण का प्रस्ताव तैयार कर दिया गया। यही कारण है कि अब नगर पालिका की कार्यप्रणाली, प्राथमिकताओं और निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। नागरिकों का कहना है कि नगर में कई ऐसे मोहल्ले हैं, जहां आज तक नाली तक नहीं बनी, लेकिन यहां चलती नाली को तोड़कर नई बनाई जा रही है।
निर्माण कार्य के दौरान एक और गंभीर पहलू सामने आया है। स्थानीय लोगों के अनुसार ठेकेदार खुद मौके पर मौजूद रहकर नाली के स्लैब तुड़वाने का काम करवा रहे हैं, जबकि नाली की वास्तविक स्थिति का निष्पक्ष आकलन ही नहीं किया गया। इससे लोगों में यह आशंका गहराने लगी है कि कहीं पुरानी नाली के ऊपर ही नई नाली खड़ी न कर दी जाए, जैसा कि पूर्व में माणक भवन के सामने कथित रूप से हो चुका है।
वार्ड क्रमांक 6 के नागरिकों का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन अनावश्यक निर्माण और संदिग्ध फैसलों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लोगों ने नगरपालिका प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए, निर्माण की वास्तविक आवश्यकता और लागत को सार्वजनिक किया जाए तथा जवाबदेही तय की जाए।
अब देखना यह है कि नगरपालिका इस सवालों की आंधी का जवाब देती है या फिर वार्ड 6 में “ज़रूरत से ज़्यादा निर्माण” की यह कहानी भी फाइलों में दबकर रह जाएगी।
