14 Jun 2026, Sun

संलग्नीकरण खत्म करने के आदेश पर उठे सवाल: कई कर्मचारी अब भी अटैच, नए आदेशों ने बढ़ाई चर्चा

बैकुण्ठपुर। स्वास्थ्य विभाग में संलग्नीकरण (अटैचमेंट) व्यवस्था समाप्त करने के लिए जारी शासन के आदेशों के बावजूद कोरिया जिले में कई कर्मचारी अब भी सुविधाजनक स्थानों पर कार्यरत दिखाई दे रहे हैं। इस स्थिति ने विभागीय कार्यप्रणाली और आदेशों के पालन को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं, नवा रायपुर द्वारा जारी निर्देशों में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि विभिन्न कार्यालयों एवं स्वास्थ्य संस्थानों में संलग्न अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके मूल पदस्थापना स्थल पर वापस भेजा जाए। इसके बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कोरिया द्वारा भी आदेश जारी किया गया, लेकिन जमीनी स्थिति को लेकर अब चर्चाएं तेज हो गई हैं।
जानकारी के अनुसार संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं छत्तीसगढ़ ने संलग्न अथवा कार्यादेशित कर्मचारियों को तत्काल उनके मूल पदस्थापना स्थल पर भेजने के निर्देश दिए थे। आदेश में यह भी उल्लेख था कि यदि कर्मचारी निर्धारित समय सीमा में अपने मूल स्थान पर कार्यभार ग्रहण नहीं करते हैं तो उनके वेतन आहरण पर रोक लगाने सहित अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। शासन के इस कदम को ग्रामीण और दूरस्थ स्वास्थ्य संस्थानों में कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया था।
हालांकि विभागीय सूत्रों के अनुसार आदेश जारी होने के बाद भी कई ऐसे कर्मचारी हैं जो आज तक मूल पदस्थापना स्थल पर प्रभावी रूप से कार्य नहीं कर रहे हैं। आरोप है कि कुछ मामलों में कर्मचारियों के नाम आदेशों में तो शामिल किए गए, लेकिन वास्तविक रूप से वे अपने मूल कार्यस्थल पर नहीं पहुंचे। यही कारण है कि अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या संलग्नीकरण समाप्त करने की प्रक्रिया केवल कागजों तक सीमित रह गई थी।

चर्चा का केंद्र बने मामलों में पटना क्षेत्र के एक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़े कुछ कर्मचारियों का नाम भी सामने आ रहा है। विभागीय हलकों में यह चर्चा है कि कुछ कर्मचारी लंबे समय तक कागजों में तो दूरस्थ स्वास्थ्य संस्थानों में पदस्थ रहे, लेकिन उनकी वास्तविक उपस्थिति को लेकर लगातार सवाल उठते रहे। स्थानीय स्तर पर यह मांग भी उठ रही है कि संबंधित स्वास्थ्य केंद्रों की उपस्थिति पंजिका, कार्य विवरण एवं वेतन भुगतान रिकॉर्ड की जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए।
मामला तब और चर्चा में आ गया जब संलग्नीकरण समाप्त करने वाले आदेश के बाद विभाग से एक अन्य आदेश जारी हुआ, जिसमें कुछ कर्मचारियों को पुनः जिला चिकित्सालय बैकुण्ठपुर अथवा अन्य स्थानों पर कार्य करने की व्यवस्था दी गई। कर्मचारियों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि यदि शासन का उद्देश्य सभी कर्मचारियों को मूल पदस्थापना स्थल पर भेजना था, तो फिर कुछ कर्मचारियों को दोबारा सुविधाजनक स्थानों पर कार्य करने की अनुमति कैसे दी गई।
स्वास्थ्य विभाग से जुड़े जानकारों का कहना है कि संलग्नीकरण की व्यवस्था वर्षों से विवादों का विषय रही है। कई बार यह आरोप लगते रहे हैं कि प्रभावशाली कर्मचारियों को जिला मुख्यालय अथवा शहरी क्षेत्रों में कार्य करने का अवसर मिल जाता है, जबकि दूरस्थ स्वास्थ्य संस्थानों में कर्मचारियों की कमी बनी रहती है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होती हैं और मरीजों को आवश्यक सुविधाएं समय पर नहीं मिल पातीं।
इसी बीच सूचना के अधिकार (आरटीआई) से जुड़े मामलों को लेकर भी कुछ कर्मचारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पूर्व में सूचना उपलब्ध कराने और प्रशासनिक नियमों के पालन को लेकर भी विवाद सामने आते रहे हैं। अब ऐसे कर्मचारियों के जिला चिकित्सालय में पुनः पहुंचने के बाद यह आशंका जताई जा रही है कि यदि नियमों का सख्ती से पालन नहीं कराया गया तो विभाग की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और अधिकारी भी अनावश्यक विवादों में घिर सकते हैं।
विशेष बात यह है कि यह पूरा मामला प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री के पड़ोसी जिले कोरिया से जुड़ा हुआ है। ऐसे में स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शासन के आदेशों के पालन को लेकर यहां सवाल उठ रहे हैं तो इस मामले की निष्पक्ष समीक्षा आवश्यक है। अब कर्मचारियों और नागरिकों की निगाहें जिला प्रशासन तथा स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर टिकी हैं। लोगों की अपेक्षा है कि वास्तविक स्थिति की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि कितने कर्मचारी वास्तव में अपने मूल पदस्थापना स्थल पर लौटे हैं और कितने अब भी विशेष व्यवस्था अथवा संलग्नीकरण के आधार पर कार्य कर रहे हैं। पारदर्शिता, समान नियमों का पालन और निष्पक्ष जांच ही इस पूरे विवाद पर विराम लगा सकती है।

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