
बैकुण्ठपुर कोरिया जिला में शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के संलग्नीकरण (अटैचमेंट) को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक हलकों में विवाद गहराता नजर आ रहा है। यह मामला अब केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि आमजन, कर्मचारी संगठनों और शिक्षाविदों के बीच भी चर्चा का विषय बन चुका है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि शासन द्वारा जारी स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद कुछ कर्मचारियों को नियमों के विपरीत शिक्षा विभाग से हटाकर राजस्व विभाग के विभिन्न कार्यालयों में संलग्न किया गया है।
सूत्रों के अनुसार, पटना तहसील क्षेत्र में पदस्थ कुछ कर्मचारियों को अन्य तहसीलों अथवा कार्यालयों में संलग्न किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि यह प्रक्रिया न तो विभागीय आवश्यकता के अनुरूप है और न ही इससे पहले कोई पारदर्शी आदेश सार्वजनिक किया गया। वहीं दूसरी ओर, 16 जून से नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हो रही है। ऐसे समय में विद्यालयों में शैक्षणिक व प्रशासनिक गतिविधियां चरम पर होती हैं, लेकिन शिक्षा विभाग के कर्मचारियों की अनुपस्थिति ने विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है।
मामले को और उलझाने वाली स्थिति तब सामने आई जब जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर से लिखित रूप में यह जानकारी दी गई कि विभाग का कोई भी कर्मचारी वर्तमान में कहीं संलग्न नहीं है। इसके विपरीत, कई विद्यालयों द्वारा अपने कर्मचारियों की मूल पदस्थापना पर वापसी के लिए पत्राचार किए जाने की सूचनाएं सामने आ रही हैं। इस विरोधाभास ने प्रशासनिक पारदर्शिता और सूचना तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कर्मचारी संगठनों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि किसी कर्मचारी को शिक्षा विभाग की मूल जिम्मेदारियों से हटाकर अन्य विभागों में संलग्न किया गया है, तो इसकी तत्काल समीक्षा होनी चाहिए। उनका तर्क है कि पहले से ही शिक्षक और सहायक स्टाफ की कमी से जूझ रहे विद्यालयों में इस तरह की तैनाती से शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होना स्वाभाविक है, जिसका सीधा असर विद्यार्थियों पर पड़ेगा।
इधर, सूत्रों के हवाले से संलग्नीकरण प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि कुछ मामलों में न तो आवश्यक अनुमोदन लिया गया और न ही स्पष्ट आदेश जारी किए गए। हालांकि, इन आरोपों की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन की ओर से भी इस विषय में कोई सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है, जिससे संदेह और गहराता जा रहा है।
जानकारों का मानना है कि यदि किसी अधिकारी द्वारा शासन अथवा कलेक्टर स्तर से जारी निर्देशों का पालन नहीं किया गया है, तो इसकी निष्पक्ष प्रशासनिक समीक्षा अनिवार्य है। कुछ शिकायतकर्ताओं ने मुख्यमंत्री कार्यालय, प्रधानमंत्री कार्यालय तथा अन्य सक्षम प्राधिकारियों को शिकायत भेजने की तैयारी की बात भी कही है। वहीं यह जानकारी भी सामने आ रही है कि प्रभावित पक्ष न्यायालय की शरण लेने पर विचार कर रहा है। यदि ऐसा होता है, तो संलग्नीकरण से जुड़े आदेश, दस्तावेज और विभागीय पत्राचार न्यायिक जांच के दायरे में आ सकते हैं।
फिलहाल, कोरिया जिले में शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के संलग्नीकरण को लेकर उठे सवालों ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर एक नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन और संबंधित विभागों पर टिकी हैं कि वे इस पूरे प्रकरण पर क्या कदम उठाते हैं और जनता के सामने स्थिति को स्पष्ट करने के लिए कौन-सा ठोस निर्णय लेते हैं।
