6 Sep 2026, Sun

छुट्टी के दिन भी खुला बैकुण्ठपुर परियोजना कार्यालय, आधी रात तक संचालन के बाद अब रविवार को भी कामकाज पर सवाल

डुमरिया परसापारा में भर्ती के दौरान 30 हजार रुपये की कथित बातचीत का मामला भी चर्चा में, आंगनबाड़ी केंद्रों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव

बैकुण्ठपुर। महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत संचालित बैकुण्ठपुर परियोजना कार्यालय इन दिनों अपने कामकाज को लेकर चर्चा में है। वर्तमान में परियोजना अधिकारी का कार्यालय धोराटीकरा स्थित निजी भवन में संचालित हो रहा है। कार्यालय के संचालन को लेकर अब कई सवाल सामने आ रहे हैं। खास तौर पर छुट्टी के दिनों में भी कार्यालय खुलने और देर रात तक कामकाज किए जाने को लेकर लोगों में चर्चा है।
बताया जा रहा है कि डुमरिया-परसापारा में भर्ती प्रक्रिया के दौरान 30 हजार रुपये “टेबल के ऊपर मत रखो” जैसी बातचीत सामने आई थी। स्थानीय स्तर पर इसे कथित तौर पर नोटों की गड्डी से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि इस मामले की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। यदि भर्ती प्रक्रिया में किसी प्रकार के लेन-देन की बात सामने आती है तो इसकी निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है। परियोजना कार्यालय के संचालन का एक और मामला चर्चा में है। पूर्व में समाचार प्रकाशित हुआ था कि बैकुण्ठपुर परियोजना कार्यालय में रात करीब 11 से 12 बजे तक कार्यालय खुलने और कामकाज होने की बात सामने आई थी। इस मामले में कलेक्टर द्वारा परियोजना अधिकारी को मौखिक रूप से फटकार लगाए जाने की भी चर्चा रही थी। इसके बावजूद अब फिर कार्यालय के इसी तरह संचालित होने की बातें सामने आ रही हैं।
रविवार 6 सितंबर को भी परियोजना कार्यालय खुला होने की जानकारी सामने आने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि आखिर ऐसा कौन सा आवश्यक शासकीय कार्य है, जिसके लिए अवकाश के दिन भी परियोजना कार्यालय संचालित करना पड़ रहा है। यदि विशेष परिस्थितियों में कार्यालय खोला गया है तो क्या इसके लिए सक्षम अधिकारी से अनुमति ली गई है और कर्मचारियों की उपस्थिति किस आधार पर दर्ज की गई है, यह भी जांच का विषय है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब परियोजना कार्यालय में छुट्टी के दिन और देर रात तक कामकाज हो रहा है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र के कई आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधा तक उपलब्ध नहीं होने की शिकायतें सामने आती रहती हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग का मुख्य उद्देश्य बच्चों, गर्भवती महिलाओं और माताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना है। ऐसे में कार्यालयीन गतिविधियों के साथ जमीनी स्तर पर आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति पर भी समान गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है। अब लोगों की मांग है कि रविवार एवं अन्य अवकाश के दिनों में कार्यालय खोलने का कारण, कर्मचारियों की उपस्थिति, कार्य की प्रकृति और सक्षम अधिकारी की अनुमति की जांच की जाए। साथ ही भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी कथित 30 हजार रुपये की बातचीत की भी निष्पक्ष जांच हो, ताकि परियोजना कार्यालय के कामकाज को लेकर उठ रहे सवालों की वास्तविकता सामने आ सके।

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