
बैकुण्ठपुर– आज के मशीनी युग में आम आदमी के हाथों से निर्मित दैनंदिन उपयोग के सामानों पर कल-करखानों में मशीनों से बने सामानों की मांग हावी है। इसके बावजूद जिला मुख्यालय बैकुण्ठपुर वन मण्डल के पूर्व वन मण्डल अधिकारी इमोतेमसु आओ की पहल ने लोगों को बांस से कई उपयोगी चीजें बनाने के लिए प्रेरित किया है। साथ ही ग्रामीण इलाके के कई बेरोजगारों को इसकी बदौलत रोजगार के अवसर भी मिल गए हैं।
जिला मुख्यालय बैकुण्ठपुर वनमण्डल के बैकुण्ठपुर वन परिक्षेत्र के आनंदपुर नर्सरी में बांस शिल्प को बढ़ावा देने और स्थानीय स्तर पर रोजगार मुहैया कराने के उद्देश्य से आनंदपुर में बांस शिल्प केंद्र की स्थापना कोरिया वन मंडल द्वारा की गई है। जहां बांस से बने विभिन्न उत्पाद लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बनते जा रहे हैं। यहां पर बनाए जा रहे आरामदायक कुर्सी, बेबी झूला, लैंपस्टैंड, बुक रेड, पेन स्टैंड, फ्लावर पार्ट्स और हैंगर इत्यादि सामग्रियां बाजारों में बिक्री के साथ-साथ जिले में आयोजित शासकीय कार्यक्रमों में भी प्रदर्शनी के तौर पर लगाकर इसका प्रचार प्रसार भी किया जाएगा। इससे लोगों में इन आकर्षक वस्तुओं को लेने हेतु उत्साह देखा जा सकता है। वन परिक्षेत्र बैकुण्ठपुर के आनंदपुर नर्सरी में बंद पड़े बांस शिल्प केंद्र को तीन वर्ष पहले पूर्व अधिकारी आओ की पहल पर शुरू कर वन विभाग की समिति द्वारा संचालित किया जा रहा है। बांस से बनने वाले सुंदर और आकर्षक वस्तुओं को लोगों तक पहुंचाने तथा स्थानीय लोगों को इस व्यवसाय में जोड़ने के उद्देश्य कोरिया वन मंडल ने इसकी शुरुआत की थी। बांस से घरेलू उपयोग के अलावा साज-सज्जा तक की सामग्री यहां के स्थानीय लोगों द्वारा तैयार की जा रही है। ऐसा होने से ना केवल लोगों को जरूरत की अच्छी सामग्री अपने आसपास सुलभ हो रही है, बल्कि लोगों को स्थानीय स्तर पर जीविका चलाने के लिए एक बढ़िया रोजगार भी उपलब्ध हो रहा है।
वन परिक्षेत्र अधिकारी अखिलेश मिश्रा ने बताया कि कोरिया जिले में एकमात्र बांस शिल्पकार केंद्र आनंदपुर में स्थानीय लोगों को इस रोजगार से जोड़कर उनकी आमदनी को बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्र में शुरुआत की गई है। महज तीन सालों में ही इस केंद्र में बांस से बनने वाले फ्लावर पार्ट्स कुर्सियां, टेबल, चूड़ी स्टैंड बच्चों के खिलौने लगभग 70 प्रकार के सामान तैयार किए जा रहे हैं। तैयार वस्तुओं को लोगों तक पहुंचाने के लिए बहुत जल्द ही एक स्टोर खोलने की योजना बनाई जा रही है। ताकि आसानी से बांस से बने सामान लोगों को मिल सकें। वर्तमान में बने सामानों को जिले में विभिन्न शासकीय कार्यक्रमों में प्रदर्शनी के तौर पर लगाया जाता है, जहां पसंद आने पर लोग इसे खरीदते भी हैं।

बांस शिल्प केंद्र में कार्य कर रहे कारीगरों ने बताया कि इस कार्य को करने से पहले उन्हें प्रशिक्षण दिया गया था। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद आसानी से वे बांस से विभिन्न प्रकार के घरेलू उपयोग के अलावा साज सज्जा तक के समान बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस केंद्र की स्थापना हो जाने से अब उन्हें स्थानीय स्तर पर ही रोजगार मुहैया हो जा रहा है, जिससे वे अपनी अतिरिक्त आमदनी बढ़ा पा रहे हैं।
