29 Apr 2026, Wed

छत्तीसगढ़ विधानसभा का विशेष सत्र पहले दिन चार दिवंगत नेताओं को दी गई विनम्र श्रद्धांजलि

रायपुर, छत्तीसगढ़ विधानसभा के दो दिवसीय विशेष सत्र के प्रथम दिवस पर आज सदन में राज्य और देश के चार दिवंगत वरिष्ठ नेताओं को विनम्र श्रद्धांजलि दी गई। सदन की बैठक शुरू होते ही विधानसभा अध्यक्ष श्री गौरीशंकर अग्रवाल ने सदस्यों को प्रदेश के पूर्व राज्यपाल श्री बलरामजीदास टण्डन, छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माता और देश के पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष श्री सोमनाथ चटर्जी और छत्तीसगढ़ सरकार के पूर्व मंत्री डाॅ. रामचन्द्र सिंहदेव के विगत दिनों हुए निधन की सूचना दी। अध्यक्ष श्री अग्रवाल ने चारों विभूतियों का जीवन-परिचय भी प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह, नेता प्रतिपक्ष श्री टी.एस. सिंहदेव, संसदीय कार्यमंत्री श्री अजय चन्द्राकर, कृषि और जल संसाधन मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल, राजस्व और उच्च शिक्षा मंत्री श्री प्रेमप्रकाश पाण्डेय, विधायक सर्वश्री भूपेश बघेल, केशव चन्द्रा और डाॅ. विमल चोपड़ा ने दिवंगत विभूतियों को याद करते हुए शोकोद्गार प्रकट किए। सदन में दो मिनट का मौन रखकर दिवंगतों को विनम्र श्रद्धांजलि दी गई।
मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह ने पूर्व राज्यपाल स्वर्गीय बलरामजी दास को याद करते हुए उनके लगभग 65 वर्षों के सार्वजनिक जीवन की विभिन्न उपलब्धियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। डाॅ. रमन सिंह ने कहा कि राज्यपाल के रूप में श्री टंडन छत्तीसगढ़ के संवैधानिक मुखिया और सदन के अविभाज्य अंग थे। उनका निधन सचमुच बड़ी क्षति है। वह काफी सरल और निश्छल स्वभाव के थे, लेकिन अपने संकल्प में अडिग और हमारे अभिभावक के समान थे। डाॅ. रमन सिंह ने कहा कि स्वर्गीय श्री टंडन वर्ष 1975 से 1977 के बीच आपातकाल के दौरान जेल में भी रहे। वर्ष 1953 से 1967 तक वह अमृतसर नगर निगम के पार्षद रहे। उनकी लोकप्रियता का इससे बड़ा उदाहरण क्या हो सकता है कि वे छह बार पंजाब विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए और पंजाब सरकार में केबिनेट मंत्री के रूप में समय-समय पर विभिन्न विभागों में कुशल प्रशासनिक क्षमता का परिचय दिया।
पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माता भारतरत्न श्री वाजपेयी मेरे गुरू और पिता-तुल्य थे। उनके निधन से सवा सौ करोड़ भारतीय की तरह मैं भी स्तब्ध और विचलित हूं। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वर्गीय श्री वाजपेयी ने अपने 50 वर्षों के संसदीय जीवन में अपनी विलक्षण प्रतिभा से पक्ष और विपक्ष दोनों में समान रूप से अपार लोकप्रियता हासिल की। उन्होंने तीन बार वर्ष 1996, 1998 और वर्ष 1999 में प्रधानमंत्री के रूप में देश को अपना कुशल नेतृत्व दिया। उनका सौम्य, प्रेरक और मिलनसार व्यक्तित्व हम सबको हमेशा याद रहेगा। डाॅ. रमन सिंह ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, सर्व शिक्षा अभियान और स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना के लिए भी स्वर्गीय श्री वाजपेयी के योगदान का विशेष रूप से उल्लेख किया। डाॅ. सिंह ने कहा- वर्ष 1999 से लेकर 2003 के बीच केन्द्रीय मंत्री के रूप में मुझे भी उनके साथ काम करने और बहुत कुछ सीखने का अवसर मिला। श्री वाजपेयी ने छत्तीसगढ़ सहित झारखण्ड और उत्तराखण्ड राज्यों का निर्माण करके देश के राजनीतिक इतिहास में एक नये युग का प्रवर्तन किया।
मुख्यमंत्री ने कहा-छत्तीसगढ़ की ढाई करोड़ से ज्यादा जनता उन्हें राज्य निर्माता के रूप में याद रखेगी। यहां की जनता के साथ श्री वाजपेयी का गहरा भावनात्मक जुड़ाव रहा। वे कई बार राज्य के विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल हुए। विदेश मंत्री के रूप में वर्ष 1977-78 में संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा में हिन्दी में भाषण देकर भारत की राष्ट्रभाषा का सम्मान बढ़ाया था। वर्ष 1998 में पोखरण में उनके नेतृत्व में सफल परमाणु परीक्षण से भारत दुनिया के एक सशक्त राष्ट्र के रूप में उभरा। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य निर्माता के रूप में अटल जी की स्मृतियों को संजोए रखने के लिए प्रदेश सरकार ने नया रायपुर का नामकरण उनके नाम पर अटल नगर किया है। वहां उनके नाम पर एक भव्य स्मारक भी बनाया जाएगा। इसके अलावा बिलासपुर विश्वविद्यालय का नामकरण उनके नाम पर करने का निर्णय लिया गया है। राजनांदगांव के मेडिकल काॅलेज, मण्डवा ताप बिजली परियोजना और रायपुर शहर के एक्सप्रेस-वे का नामकरण भी उनके नाम पर किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल की एक बटालियन का नामकरण अटलजी की याद में पोखरण बटालियन करने का भी निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री ने सदन को यह भी बताया कि अटलजी के स्मृति में राज्य सरकार द्वारा ‘सुशासन पुरस्कार’ शुरू किया जाएगा, जो त्रिस्तरीय पंचायतों और शहरी निकायों के लिए होगा। यह पुरस्कार राज्य स्थापना दिवस पर एक नवम्बर को राज्योत्सव में दिया जाएगा।
डाॅ. रमन सिंह ने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष स्वर्गीय श्री सोमनाथ चटर्जी का उल्लेख करते हुए कहा कि श्री चटर्जी के निधन से देश ने संसदीय लोकतंत्र के महान चिंतक, विचारक, विद्वान राजनेता, सुयोग्य और अनुभवी प्रशासक तथा कर्मठ जनप्रतिनिधि को हमेशा के लिए खो दिया है। डाॅ. सिंह ने कहा-मुझे भी एक सांसद के रूप में उनसे काफी कुछ सीखने और समझने को मिला। मुख्यमंत्री ने स्वर्गीय श्री चटर्जी के वर्ष 2005 के छत्तीसगढ़ प्रवास का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 14 नवम्बर 2005 को वे छत्तीसगढ़ विधानसभा द्वारा आयोजित सभी राज्यों की विधानसभाओं और विधान परिषदों के अध्यक्षों और सचिवों के पांच दिवसीय सम्मेलन के शुभारंभ के लिए रायपुर आए थे। उन्होंने ‘नागरिक और सरकार के बीच मध्यस्थ के रूप में सदस्यों की भूमिका’ विषय पर अपना प्रेरक व्याख्यान भी दिया था। स्वर्गीय श्री चटर्जी ने वर्ष 2004 से वर्ष 2009 तक लोकसभा अध्यक्ष के रूप में सदन का अत्यंत कुशलता से संचालन किया। सहज-सरल स्वभाव के स्वर्गीय श्री चटर्जी को उनके सादगीपूर्ण व्यक्तित्व और मिलनसार व्यवहार की वजह से समाज के सभी वर्गों और देश के सभी दलों के बीच अत्यंत सम्मानजनक स्थान प्राप्त था।
मुख्यमंत्री ने स्वर्गीय डाॅ. रामचंद्र सिंहदेव को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका सुदीर्घ सार्वजनिक जीवन सभी लोगों के लिए सादगी और शुचिता का प्रेरणादायक उदाहरण रहा। वह एक सजग और कर्मठ जनप्रतिनिधि थे। स्वर्गीय डाॅ. सिंहदेव ने लगभग पांच दशक लम्बे सार्वजनिक जीवन में सादगी के साथ जनता की सेवा को अपना लक्ष्य माना और जीवनभर समाज और देश की सेवा में लगे रहे। तत्कालीन अविभाजित मध्यप्रदेश के विभिन्न विभागों के मंत्री और वर्ष 2000 में गठित छत्तीसगढ़ राज्य के प्रथम वित्त मंत्री के रूप में उनकी सेवाओं को याद रखा जाएगा। डाॅ. रमन सिंह ने कहा-स्वर्गीय डाॅ. सिंहदेव छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के राजपरिवार से ताल्लुक रखते थे, लेकिन उन्होंने राजा के रूप में नहीं, बल्कि अपना पूरा जीवन फकीर की तरह गुजारा। वह पक्ष और विपक्ष सभी लोगों में समान रूप से लोकप्रिय थे। डाॅ. सिंहदेव मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की जनता के लिए और समूची पीढ़ी के लिए आदर्श रहेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा-स्वर्गीय डाॅ. सिंहदेव एक विद्वान, अर्थशास़्त्री और चिंतक थे। पर्यावरण और जल संसाधन जैसे विषयों पर उनकी गहरी पकड़ थी। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं के निर्माण और विकास में उनका योगदान आज भी याद किया जाता है। मुझे भी उनका आशीर्वाद और मार्गदर्शन हमेशा मिलता रहा। छत्तीसगढ़ राज्य के विकास से जुड़े विषयों को लेकर कई बार वे मुझे पत्र लिखकर महत्वपूर्ण सुझाव भी देते रहते थे।

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