11 May 2026, Mon

‘उच्च कोटि का प्राणायाम है क्रिया योग’

Naveen.krishna@timesgroup.com

नोएडा : योग सिर्फ शारीरिक वर्जिश नहीं बल्कि ध्यान भी है और क्रिया योग उच्च कोटि का प्राणायाम है। इसके माध्यम से साधक परम तत्व का साक्षात्कार कर सकता है। लेकिन सिर्फ प्राणायाम से हम प्रगति नहीं कर सकते। इसके साथ ही नैतिक नियमों का पालन भी जरूरी होता है। ये बातें अमेरिका से नोएडा आए सेल्फ रियलाइजेशन फेलोशिप ( SRF) और योगदा सत्संग सोसायटी के आध्यात्मिक प्रमुख और वैश्विक अध्यक्ष स्वामी चिदानंद गिरी और योगदा सत्संग सोसायटी के सेक्रेटरी स्वामी ईश्वरानंद ने एनबीटी से खास बातचीत में कहीं। क्रिया योग के दुनिया भर में प्रचार प्रसार के लिए परमहंस योगानन्द ने योगदा सत्संग सोसाइटी और एसआरएफ की स्थापना की थी।

सवाल : क्रिया योग क्या है और योग और पतंजलि के अष्टांग योग से इसका संबंध है या इनमें अंतर है?

जवाब : योग के पहले चरण में हम अपने शरीर और मन को आत्मा से जोड़ते हैं। फिर आत्मा को परमात्मा से जोड़ते हैं। यह योग का संपूर्ण स्वरूप है। पतंजलि योग इसकी एक अभिव्यक्ति है जो सबसे स्पष्ट और वैज्ञानिक है। पतंजलि योग को हम अष्टांग योग भी कहते हैं और क्रिया योग इसी पतंजलि योग या राजयोग का एक स्वरूप है। क्रिया योग प्रणाली में भी प्राणायाम का महत्व है। इसका अभ्यास करके कोई भी शख्स वह परिणाम प्राप्त कर सकता है जिसे हमारे योगियों ने किया था। इसमें शरीर और मन को अनुशासन में लाने का प्रावधान है।

सवाल : प्राणायाम की चर्चा पतंजलि योग में भी है तो क्रिया योग में उससे अलग क्या है?

जवाब : यह पतंजलि योग से भिन्न नहीं है। फर्क सिर्फ इतना है कि महर्षि पतंजलि ने योग दर्शन में इसकी विस्तार से व्याख्या नहीं की है, सिर्फ संकेत रूप में इस पर चर्चा की है। क्रिया योग में इसके बारे में विस्तार से चर्चा की गई है।

सवाल : क्रिया योग की क्या अलग-अलग अवस्थाएं होती हैं, जैसे पतंजलि योग में यम, नियम, से लेकर धारणा, ध्यान, समाधि तक है?

जवाब : क्रिया योग एक संपूर्ण मार्ग है, अष्टांग मार्ग की तरह। इसमें प्राणायाम पर ज्यादा जोर या महत्व देते हैं लेकिन नैतिक या आध्यात्मिक नियमों का पालन किए बिना हम सिर्फ प्राणायाम के अभ्यास से प्रगति नहीं कर सकते। क्रिया योग का केद्र बिंदु प्राणायाम है।

सवाल : बाजार के योग से क्रिया योग कैसे अलग है?

जवाब : दुनिया में बहुत प्रकार के लोग हैं और इसकी तुलना करने में मेरी दिलचस्पी नहीं है।

सवाल : परम तत्व क्या है?

जवाब : परम तत्व या परंब्रह्म निराकार और निर्गुण है। जब सृष्टि का प्रारंभ हुआ तब उसमें से एक स्पंदन निकला जिसे हम ओम के नाम से भी पुकारते हैं। यह सिर्फ ध्वनि नहीं है बल्कि यह चेतना और प्रज्ञा का स्पंदन है। उसमें शक्ति भी है। आगे चलकर यह ओम जब और घनीभूत होता है यानी सृष्टि का विकास होता है तो यह दूसरे तत्वों में बदल जाता है। इसकी उल्लेख सांख्य दर्शन में भी होता है। परम तत्व से निकले हुए ओम से ही इस सृष्टि का निर्माण हुआ है।

सवाल : तो क्या ओम परम तत्व नहीं है?

जवाब : ओम परम तत्व भी है और परम तत्व ओम है। दोनों को अलग करना मुश्किल है। दोनों का अलगाव आभास मात्र है।

सवाल : क्रिया योग कितना प्राचीन है?

जवाब : जब महाभारत का युद्ध शुरू होने वाला था तब अर्जुन के मोह को दूर करने के लिए कृष्ण ने उन्हें ज्ञान का तत्व समझाया था। अर्जुन उन्नत शिष्य थे तो वह संक्षेप में बातें समझ गए। लेकिन उसी को साधारण मनुष्य को समझाने के लिए महर्षि वेदव्यास ने अठारह अध्याय लिखे। उसमें पूरा ज्ञान है। भक्ति योग, ज्ञान योग, राज योग है और क्रिया योग भी।

सवाल : क्रिया योग का लक्ष्य क्या है?

जवाब : क्रिया योग का एक मात्र लक्ष्य है परम तत्व तक पहुंचना। हम परमात्मा या भगवान की बात करते हैं तो यह हमारे लिए शब्द मात्र हैं। सवाल उठता है कि क्या भगवान हैं? क्रिया योग अंतत: निराकार उपासना तक ले जाती है। क्रिया योग एक संपूर्ण प्रणाली का नाम है और यह उच्च कोटि का प्राणायाम है।

आज से तीन दिनों का आध्यात्मिक सम्मेलन

एनबीटी : सेक्टर-62 स्थित योगदा सत्संग सोसायटी में तीन दिनों का आध्यात्मिक सम्मेलन हो रहा है जिसमें क्रिया दीक्षा दी जाएगी और लेक्चर भी होंगे। 20 अक्टूबर को यहां स्वामी चिदानंद ‘क्रिया योग की वर्तमान समय में प्रासंगिकता और महत्व’ विषय पर व्याख्यान देंगे। उसके बाद दूसरे संन्यासियों के भी प्रवचन होंगे। सम्मेलन में शामिल होने दुबई से आए मनू मिश्रा ने बताया कि सत्संग में भाग लेने के लिए न सिर्फ देश के कई हिस्सों से बल्कि अमेरिका और यूरोप से भी साधक आए हैं।

Source: Uttarpradesh Feed By RSS

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