29 Apr 2026, Wed

मप्र के दूरस्थ क्षेत्रों में साल भर सेवाएं नहीं दीं, तो रद्द होगा डॉक्टरों का पंजीयन

इंदौर, दो दिसंबर (भाषा) मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों से पढ़ाई के बाद दूरस्थ क्षेत्रों में सेवाएं नहीं देने वाले डॉक्टरों पर लगाम कसने के लिये राज्य सरकार नये नियम तय करने जा रही है। प्रस्तावित नियमों के तहत अगर इन डॉक्टरों ने पढ़ाई पूरी करने के बाद एक साल तक दूरस्थ क्षेत्रों में अनिवार्य सेवाएं नहीं दीं, तो राज्य सरकार बतौर मेडिकल प्रैक्टिशनर उनका पंजीयन रद्द कर देगी। राज्य की चिकित्सा शिक्षा मंत्री विजयलक्ष्मी साधौ ने सोमवार को यहां एक कार्यक्रम के दौरान संवाददाताओं को बताया, “हम नियम बनाने जा रहे हैं कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों के स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के लिये पढ़ाई पूरी करने के बाद दूरस्थ क्षेत्रों में एक साल तक सेवाएं देना अनिवार्य होगा। वरना (बतौर मेडिकल प्रैक्टिशनर) उनका पंजीयन रद्द हो जायेगा।” उन्होंने कहा, “अब तक हम सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले छात्रों से इस बात का बॉन्ड भरवाते थे कि वे पढ़ाई के बाद साल भर तक दूरस्थ क्षेत्रों में सेवाएं देंगे। लेकिन पढ़ाई पूरी होने के बाद वे बॉन्ड का तय धन सरकारी खजाने में जमा कर इस शर्त से मुक्त हो जाते थे।” साधौ ने बताया कि प्रदेश के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों के करीब 70 फीसदी पद खाली पड़े हैं। इसके मद्देनजर दूरस्थ क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिये अलग-अलग उपाय किये जा रहे हैं। मीडिया से बातचीत से पहले, चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने यहां शासकीय महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय में एक करोड़ 74 लाख रुपये की लागत से बनी वायरोलॉजी प्रयोगशाला और अन्य सुविधाओं का लोकार्पण किया। इस प्रयोगशाला के जरिये स्वाइन फ्लू जैसी बीमारियों की जांच हो सकेगी। इस प्रयोगशाला के शुरू होने से पहले शहर में इन बीमारियों की जांच की स्तरीय सुविधा नहीं थी।

Source: Madhyapradesh

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