12 May 2026, Tue

देश में आग से सालभर में 27 हजार लोगों की मौत

मालती अय्यर, मुंबईभारत में साल 2017 में 27,027 लोगों की मौत आग में जलने की वजह से हुई, जबकि पूरी दुनिया में आग लगने की करीब 90 लाख घटनाओं में 1.2 लाख लोगों की जान गई। यानी आग की वजह से जान गंवाने वालों में हर पांचवां व्यक्ति भारतीय था। BMJ इंजरी प्रिवेंशन जर्नल में हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में आग लगने की 16 लाख घटनाएं हुईं, जिनमें 27,027 लोगों ने अपनी जिंदगी गंवाई। इस रिपोर्ट में 195 देशों के आंकड़ों को शामिल किया गया है। भारत में मृतकों की संख्या चीन के मुकाबले 2.5 गुना अधिक रही, जहां 2017 में आग लगने की वजह से 10,836 लोगों की मौत हुई।

भारत, पाकिस्तान सहित 7 देशों में आग से जुड़ी आधी मौतें होती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 5 साल से कम के बच्चे और 60 साल से अधिक के व्यस्क सबसे अधिक शिकार होते हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी की वजह से मौतों का आंकड़ा बढ़ता है।

नवी मुंबई में एयरोली बर्न्स सेंटर के डॉक्टर एस केसवानी कहते हैं ‘पहले मुंबई में आग से जले लोगों में 80 पर्सेंट महिलाएं होती थीं, लेकिन अब बर्न वॉर्ड्स में बुजुर्ग और बच्चे अधिक दिखते हैं।’ उन्होंने कहा कि इस बदलाव के पीछे कई सामाजिक कारण हैं, जैसे आयुकाल बढ़ा है और महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हुई हैं। उन्होंने कहा, ‘अब अपेक्षाकृत अधिक महिलाएं नौकरी करती हैं, अब बच्चों की देखभाल या तो घर पर बुजर्ग करते हैं या फिर बच्चे क्रच (पालना-घर) में रहते हैं।’

रिपोर्ट से उजागर होता है कि लैंगिक हिंसा भी भारत में अधिक मौत के लिए जिम्मेदार है। कर्नाटक में सिंथैटिक साड़ियों की वजह से अधिक महिलाओं की जान गई। इसमें कहा गया है कि भारत में स्वास्थ्य सुविधाओं का भी अभाव है। डॉक्टर केसवानी ने कहा, ‘बर्न मैनेजमेंट के लिए मैनपावर की जरूरत है। एक बर्न पेशेंट की ड्रेसिंग के लिए छह लोगों की जरूरत होती है। लेकिन हमारे सरकारी अस्पतालों, जहां अधिकांश मरीज जाते हैं, में डॉक्टर, नर्स और मरीज का अनुपात खराब है।’

प्राइवेट सेक्टर के कम ही अस्पताल बर्न का उपचार करते हैं, क्योंकि इसमें अधिक निवेश की जरूरत होती है, लेकिन कमाई अधिक नहीं होती। मुंबई के केवल दो अस्पतालों में बर्न वार्ड हैं, लेकिन सभी सरकारी अस्पतालों को जले हुए मरीजों का इलाज करना होता है, भले ही सुविधाओं का अभाव हो। एक सरकारी अस्पताल के डॉक्टर ने कहा, ‘एक प्राइवेट अस्पताल के ICU में रहने का खर्च 25 से 50 हजार रुपये का हो सकता है। जले हुए मरीजों को लंबे समय तक अस्पताल में रहना पड़ता है और बिल प्रति महीने 18 लाख रुपये तक जा सकता है। कितने भारतीय यह खर्च वहन कर सकते हैं?’

हालांकि, अधिकतर देशों में आग की वजहों से होने वाली मौतों में काफी कमी आई है। भारत में भी 1990 से 2017 के बीच मौतों की संख्या में करीब 30% की कमी आई है।

Source: National

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