11 May 2026, Mon

'चिंपैंजी से विकसित हुई इंसानों में नृत्य कला'

क्योटो
जापान की क्योटो विश्वविद्यालय में एक अध्ययन में पाया गया है कि इंसानों में नाचने की कला चिंपैंजी से विकसित हई है। अध्ययन में वैज्ञानिकों ने चिंपैंजियों को पियानो की धुनों पर ताली बजाते,पैर झटकते और भागते हुए देखा गया। यह अध्ययन 6 दिनों तक 7 चिंपैंजियों पर 2-2 मिनट के अंतराल पर प्यानों की धुनों पर अजमाया गया।

विश्वविद्यालय के शीर्ष शोधकर्ता यूको हटोरी ने कहा, ‘चिंपैंजी एक हद तक वैसे ही नाचते दिखे जैसे इंसान नृत्य करते हैं।’ इस अध्ययन में पाया गया कि इन वानरों को किसी ने पहले से कोई शिक्षा नहीं दी थी और धुन बजते ही सब अचानक थिरकनें लगे।

शोधकर्ताओं ने ‘प्रोसीडिंग्स ऑफ द नैशनल एकेडमी ऑफ साइंसेस’ में लिखा कि ‘मनुष्यों में संगीत सुनने की क्षमता में इतना अंतर नहीं देखा गया वहीं पाया गया कि पुरुष चिंपैंजियों में ध्वनि के प्रति संवेदनशीलता अधिक हो सकती है, क्योंकि चिंपैंजी को मानव द्वारा साझा किए गए सामान्य पूर्वजों से विचलित होने के बाद अधिग्रहित किया जाता है।’

शोध में पाया गया कि संगीत सुनने से मनुष्यों में एक अजीब हलचल होती है। इससे उनके दिमाग की मोटरी और ऑडटरी क्षेत्रों के बीच एक निकट संबंध देखा गया। परिणाम में पाया गया कि संगीत और नृत्य के लिए आवश्यक शर्तें गहराई से निहित हैं और लगभग छह अरब साल पहले मानव और चिंपैंजी के पूर्वज एक थे।

बता दें कि अबतक नृत्य कला इंसानों की विशेषता थी मगर चिंपैंजियों पर किए शोध के बाद यह बात गलत साबित होती दिख रही है।

Source: International

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *