
शासन की आँखों मे धूल झोंकते वन मंडल मनेंद्रगढ़ छेत्र के अधिकारी
अपने आप को पाक साफ़ बताने के लिए पेड न्यूज के माध्यम से लूट रहे वाहवाही
5 हेक्टेयर का गायब प्लांटेशन भी शायद उग जाए
इंट्रो: आप सब जानते है कई बार पढ़ा और बुजुर्गों से सुना भी होगा कि रेगिस्तान में दूर दूर तक पानी नही होता परंतु वहाँ विचरण करने वाले जंगली जानवर को पानी की तलाश करनी होती है। दूर दूर तक पानी नही सिर्फ भृमजाल मृगमरीचिका होती है, जानवर इस मृगमरीचिका में फस कर अपनी जान से हाँथ धो बैठता है। ऐसा ही कुछ नजारा मनेंद्रगढ़ वन मंडल क्षेत्र में भी इन दिनों दिखाई दे रहा है,नरवा निर्माण किया गया पर नरवा का उद्देश्य क्या है यह शायद मनेंद्रगढ़ वन मंडल नही जानता, चटनियां हसदेव नदी तट पर 5 हेक्टेयर में मिश्रित प्लान्टेसन किया गया था भी य नही यह तो उस छेत्र के अधिकारियों को ही पता है। सब कुछ यहाँ भृमित करने वाला है उस पर सोने पे सुहागा यह कि कुछ पेड चैनलों के माध्यम से मनेंद्रगढ़ वन मंडल पत्थर में फूल खिलाने में तुला हुआ है। जो ठीक उसी कहावत को चरितार्थ करता है जंगल मे मोर नाचा किसने देखा किसने देखा…………..
मनेंद्रगढ़ कोरिया – प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल रात दिन एक कर पर्यवारण के बैलेंस और जंगलों में इजाफे के लिए भरपूर धनराशि उपलब्ध करवा रहे ताकि वनों के घनत्व और पर्यवारण का संतुलन बना रहे,कुछ माह पहले ही छत्तीसगढ़ शासन को पर्यावरण और वन संरक्षण के लिए भारत सरकार पुरूस्कृत भी कर चुकी है,मनेंद्रगढ़ वन मंडल छेत्र ठीक इसके विपरीत अपना प्रदर्शन कर रहा, जंगलों की कटाई , वृक्षारोपण, लैंटाना उन्मूलन, अवैध कोयला खदानों का संचालन , सूखे नरवा की हालत किसी से छुपी नही लेकिन कुछ चरणवंदना में डूबे पेड न्यूज चैनलों को चंद टुकड़े फेंककर कर अपने फेवर में खबर चलवाने में पूरे छत्तीसगढ़ में मनेंद्रगढ़ वन मंडल प्रथम स्थान पर है तो कोई अतिश्योक्ति नही होगी
क्या है मामला…
एक कहावत है की सूपा बोले तो बोले पर चलनी कैसे बोले।बड़ा ही हास्यप्रद वाक्या का दौर इन दिनों मनेंद्रगढ़ वन मंडल के वन परिक्षेत्र मनेंद्रगढ़ में ब्याप्त है।अपनी करतूतों की रोज खुलती पोल और लापरवाही पर मंथन कर अपने कार्यशैली को सुधारने की बजाय जनाब रेंजर साहब के पास सिर्फ एक ही काम बाकी रह गया है।वो भी गुलमोहर और बोगन बेलिया जैसे दो चार पौधों के पास उछल उछल कर फोटो खिंचवाने और फिर पेड न्यूज़ पर अपनी उपलब्धि गिनाने का। आपको बता दें की जिस तरीके से मनेंद्रगढ़ वन परिक्षेत्र के कई कक्ष क्रमांक में जंगलों की कटाई,कोयला खनन,पत्थरों में प्लांटेशन सहित बिना पानी के नरवा जैसा लापरवाही वाला मंजर देखने को मिला और हमने उसे पूरी प्रमुखता से प्रकाशित भी किया।जिसके बाद ऐसा प्रतीत होता है की जनाब जिम्मेदार, अखबारों की सत प्रतिशत खबर को ही फर्जी और गलत बताने का जैसे अभियान ही छेड़ दिए हैं।
हम कहते हैं,,रेंजर साहब चटनियां हसदेव नदी तट पर 5 हेक्टेयर के मिश्रित प्लांटेशन पर भी फोटो खिंचवाकर आइए शायद आपके सुंदर चरणों के स्पर्श से वहां की जमीन पर भी जादू हो जाए और जमीन से गायब प्लांटेशन हरियाली में बदल जाए।
खैर,, सांच को कैसी आंच देखिए बिना पानी का नरवा,,,
जी हां, जल जमीन और जीने के लिए पर्यावरण के संतुलन बावत छत्तीसगढ़ के भूपेश सरकार की सफल योजना पर जोरदार ग्रहण लगाने में मनेंद्रगढ़ वन मंडल पहले भी अखबारों की सुर्खियां बटोर चुका है।उसी के आज की पोल खोल अभियान की कड़ी में आपको बिना पानी के नरवा का रुख कराते हैं।अवगत करा दें कि जिस तरह पहाड़ी के उपरी हिस्से या टापू में मलगा मार्ग पर नरवा निर्माण कराया गया था।ठीक उसी तरह मनेंद्रगढ़ वन परिक्षेत्र द्वारा जंगलों में बनाया गया है।आपको जानकर हैरानी होगी की नरवा जिन उद्देश्यों के लिए निर्माण कराए जाते हैं।इस नरवा को देखकर यहां पर बिल्कुल भी ये सिद्ध नहीं होता की यह कार्य वास्तविक उद्देश्य की पूर्ति कर सकेगा।मौका मुआयना और जमीनी स्तर की पड़ताल पर हमने जब इस नरवा का हाल देखा तो ऐसा आभास हुआ कि यह कार्य काफी गुणवत्ता विहीन और घटिया दर्जे का है। हालात को देखकर प्रतीत हुआ की बरसात बीतने के बाद भी इस नरवा इतना पानी नहीं बचा या इकट्ठा हुआ की पंछी भी अपनी प्यास बुझा सकें,,बहरहाल मनेंद्रगढ़ वन परिक्षेत्र की आगे की पड़ताल अनवरत जारी रहेगी।कई और हैरत अंगेज जंगलों के अंदर की कहानी से आपको रू ब रू कराएंगे।

पेड न्यूज चैनलों की चांदी
सइंया भय कोतवाल तो फिर डर कहे का, जी हां मनेंद्रगढ़ वन मंडल इस समय कोतवाल की भूमिका में है और चंद पैड चैनल उसके पैरोकार बने हुए है, सूत्रों की माने तो मनेंद्रगढ़ वन मंडल में इन दिनों पेड़ न्यूज़ चलाने वालों की चांदी कट रही, खबर वो चलाओ जिससे साहब राजी हो फिर शाम को महफ़िल में चंद चाटुकारों के लिएमशहूर फिल्मों के संगीत की महफ़िल जमती है जहाँ पर तरल पदार्थों का सेवन कर रात भर जाम से जाम टकराएगा, जब नशा छाएगा तो मनेंद्रगढ़ वन मंडल सब भूल जाएगा… यही वह समय होता है जब अधिकारी अपनी कमजोरियों को छुपाने के लिए कुछ चांडाल चौकड़ी को जमा कर अपने पापों पर पर्दाफाश अभियान को झूठा बताने का असफल प्रयास करते है।
