शासकीय कार्यालय में बाहरी लोग कर रहे हैं स्टरशिप शासन की गोपनीय नीति को रही भंग
बैकुण्ठपुर। तत्कालीन कलेक्टर कोरिया कुलदीप शर्मा के कमान संभालने के पश्चात प्रशासनिक कसावट हेतु आवश्यक दिशा निर्देश एवं औचक निरीक्षण कर लापरवाह अधिकारी, बाबू पर कार्यवाही के बाद कोरिया जिले के सभी राजस्व न्यायालयों में कार्य की जो प्रगति सामनें आई है, उसे मुख्यालय तहसील मे पदस्त कुछ खास व लिपिकों की मेहरबानी से कलेक्टर कोरिया के निर्देशानुसार हो रहे तेजी से कार्य पर अंकुश लग रहा है। तहसील बैकुण्ठपुर मे पदस्थ तहसीलदार के लिपिक के हौंसले इतने बुलंद हैं कि, जिला अधिकारियों के द्वारा लंबित प्रकरणों को जल्द से जल्द निपटारा करनें की बात लगातार कह रहे है, इसके बाद भी मुख्यालय तहसीलदार के आंखों मे धुल झोंकते हुऐ, लिपिकों के द्वारा लंबित प्रकरणों को लगातार दबाते जा रहे है। वहीं मुख्यालय मे पदस्त तहसीलदार के कार्यों को देख कर जिला अधिकारी कार्य के प्रति ईमानदारी देख सराहना कर रहें है तो वहीं दूसरी तरफ तहसीलदार के रीडर स्टाफ की कमी बताकर निजि व्यक्ति को काम पर रखकर भ्रस्टाचार को अंजाम दे रहे है। जिस कारण न्यायालीन कार्य की गोपनीयता में सेंध लगने से इंकार भी नहीं किया जा सकता। निजी व्यक्तियों को साथ रखने से उन्हें कार्य मे कितना सहयोग मिल रहा है इस बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है की 2018 से पडे बंटवारा व फौत की फाईल दबी रखी हुई है किन्ता अब तब ना बंटवारा हुआ और ना ही फौत चढ़ा, यहां पदस्त मुख्य रिडर के द्वारा अपनें स्वयं के खर्चे से दो लोगों को शासकीय कार्य हेतु रखा गया है, पिछली बार शिकायत होनें के बाद उन्हे हटा दिया गया था, किन्तु अधिकारी के जाते ही रिडर के द्वारा उन दोनों को वापस बुला लिया गया। तहसील कार्यालय मे काम करानें से पहले चढावा चढाना भी जरुरी रहता है अन्यथा आप जन्म प्रमाण पत्र भी नहीं बनवा सकते। यहां रिडर के द्वारा नए नए तरीके अपना कर ग्रामीण किसानों को रुपये देनें हेतु मजबुर कर दिया जाता है, आखिरकार ग्रामीण थक हारकर उनकी मांगों को पुरा करता है। क ई किसानों ने बताया की जब तक चढावा न चढाया जाऐ तब तक किसी भी प्रकार का कार्य यहां नहीं होता, यहां के मुख्य लिपिक अधिकारी के आदेश को भी अनसुना कर देते है। जिसके कारण दुर से आए हम ग्रामीण मजबुर हो कर उनकी बात मानते है, यदि हम ऐसा नहीं करेंगे तो स्पष्ट कहां जाता है तोर काम नई होऐ जा साहब ला बताऐ देबे। यदि हम अधिकारी तहसीलदार के पास जा कर आग्रह करते है तब की स्थिति मे फाईल नहीं मिल रही कह कर साहब के बातों को दरकिनार कर देते है। जो स्थति बैकुण्ठपुर तहसील मे निर्मित है उसके कारण राजस्व विभाग से जुड़ा हर काम पटरी से उतर गए है। बीते कुछ समय से राजस्व कार्यालय में विभिन्न कार्य करानें आऐ ग्रामीण तहसील में कार्य नहीं होने से बैरंग लौट रहे है। तहसीलदार की कार्यालयीन अनुपस्थिति में उनके बाबू द्वारा ग्रामीण के आवेदन की पावती भी नहीं देते और मांग पूरी नहीं होने पर सीधे वापस भगा दिया जाता। इनके द्वारा बिना पैसे के कोई भी कार्य नहीं किया जाता और न देने पर कार्य को लटका दिया जाता है। जिससे किसान,ग्रामीण व स्थानीय नागरिक परेशान होकर मजबूरी में पैसे देने को मजबूर रहते हैं।
पदस्थ बाबू कार्यालय में काम लेकर पहुंचने वाले लोगों से सीधे मुंह बात नहीं करते। कई बार न्यायालय में शाम होने के पश्चात ख़ास लोगों व दलालों के कार्य में व्यवधान उत्पन्न न हो लोगों को बाहर निकाल कर ताला लगा कर कार्य किया जाता हैं।
जब से वर्तमान रीडर पदस्थ है तब से कई फ़ाइल तो आज भी तहसील से गायब है जिसकी शिकायत समय समय पर उच्च अधिकारियों के पास की गई हैं। पर पता नहीं किनके संरक्षण में आज तक इन पर कोई कार्यवाही नही हो पाई है। जिससे बाबू के हौंसले बुलंद हैं और तहसील कार्यालय में पुरी तरह से अव्यवस्था का आलम है। जबकि मुख्य सचिव ने 25 फरवरी को मंत्रालय महानदी भवन से अधिकारियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सख्त निर्देश दिए कि लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत प्रकरणों के निराकरण निर्धारित समय-सीमा में करना सुनिश्चित करें। मुख्य सचिव के निर्देशानुसार नामांतरण, फ़ौति, सीमांकन, बटवारा, डायवर्सन, ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि पट्टे के धारकों को भू-स्वामित्व अधिकार, नवीन ऋण पुस्तिका प्रदान करना और अन्य राजस्व प्रकरणों के निराकरण तेजी से करवाए तथा लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर कार्यवाही करें। उन्होंने नामांतरण नियमों के सरलीकरण के लिए भी अधिकारियों को शीघ्रता से कार्यवाही के निर्देश दिए है जिसके पश्चात भी यहां पर तहसीलदार के रीडर वर्षों से जमे हुए हैं।
ज्ञात हो की कुछ समय पूर्व अधिवक्ता संघ के द्वारा भी कलेक्टर महोदय से उक्त रीडर की तहसील मे फैले अव्यवस्था की विस्तृत जानकारी के साथ शिकायत की गई थी। जिसके बाद कलेक्टर महोदय द्वारा लगातार न्यायालयों में औचक निरीक्षण किया जा रहा है, लगातार होते कार्यवाही के बाद भी इस प्रकार के भ्रष्टाचार
कर्मचारी के हौसले बुलंद है।
