एसईसीएल नें नियम विरुद्ध तरीके से गोदनामा बनवाकर कई एकड़ जमीन कराई अपने नाम- मामले की शिकायत प्रदेश की राजधानी तक
बैकुण्ठपुर। इन दिनों जिला मुख्यालय बैकुण्ठपुर के आसपास भू-माफियाओं का आतंक सिर चढ़कर बोल रहा है जिसकी कई बार शिकायत भी हो चुकी है किसानों के द्वारा किया जा चुका है, कई प्रताड़ित भी हैं। कई लोगों की जमीन को भू-माफियाओं के द्वारा नियम के विपरीत जाकर बेच दिया गया तो कई जमीनों में अपना नाम चढ़ा लिया गया ऐसे दर्जनों प्रकरण है जो बैकुण्ठपुर तहसील में देखने को मिलेंगे, कई बार तो पटवारियों की मिलीभगत से ही जमीन जिन किसानों का है उन्हें यह पता नहीं होता कि जमीन उनकी है या दूसरे की भू-माफियाओं के द्वारा भूमि स्वामियों को दूसरे की जमीन गवाही में साइन करना बताकर उनकी जमीन खरीद ली जाती है। बैकुण्ठपुर रजिस्ट्रार कार्यालय में भी एसे भू-माफियाओं को पूरा खुला संरक्षण दिया जाता है। जब ऐसा मामला भू-माफिया लाते हैं तो रजिस्ट्रार कार्यालय के कोई भी जवाबदार अधिकारी भू-स्वामियों को किसी प्रकार से यह नहीं बताते कि उनकी जमीन बिक्री हो रही कितने में बिक रही है और कौन खरीदार है। दर्जनों शिकायत एसपी कार्यालय, बैकुण्ठपुर तहसील, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व व कलेक्ट्रेट कार्यालय में हो चुकी है। जिसके बाद भी अब तक कोई कार्यवाही नहीं हो सकी है। जिसके कारण भू-माफियाओं के हौसला बुलंद है भू-माफियाओं में कई शासकीय कर्मचारी सहित जनप्रतिनिधि या किसी भी पार्टी से जुड़े हुए लोगों के द्वारा फर्जीवाड़ा किया जाता है। फर्जी प्रकरण तैयार कर जमीन रजिस्ट्री कराने के बाद शासकीय कर्मचारियों के व जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत से शिकायत हुए मामलों को अंदर ही अंदर दबा दिया जाता है जिसस परेशान किसान भी उक्त मामले में ध्यान नहीं देते हैं। एक ऐसा ही मामला शिवपुर का सामनें आया है, जहां पटवारी, आरआई व तहसील कार्यालय की मिली भगत से शासकिय कर्मचारी के द्वारा गोदनामा करा कर कई एकड जमीन को अपनें नाम करा लिया है। गोदनामा के नियमों के अनुसार जमीन क्रेता व विक्रेता के द्वारा गोदनामा लेने के समय अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को आवेदन देना होता है किन्तु बिना किसी आवेदन के ही गोदनामा करा लिया गया है। शिवपुर चरचा मे 2014 से 2016 तक जो आरआई व पटवारी रहे उनकी मिली भगत से कई मामले ऐसे है जिनके शिकायत हो चुकि है, लेकिन शिकायतों की फाईलें दबी पडी हुई है। फाईल दबनें का मुख्य कारण है कि जिले के स्थानिय कार्यालय मे शिकायत करनें के बाद शिकायतों की फाईल राजनीतिक जनप्रतिनिधियों के दबाव के कारण प्रशासनिक अधिकारी मजबूरी में फाइलों को दबा देते हैं, जिसके कारण शिकायत पत्र दब जाता है और कार्यवाही नहीं हो पाती है किंतु अब शिकायतकर्ता ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर सहित देश की राजधानी दिल्ली प्रधानमंत्री कार्यालय तक शिकायत भेजी गई है एवं निष्पक्ष जांच की मांग की गई है हमें उम्मीद है कि प्रधानमंत्री कार्यालय से अवश्य ही आदेश आएगा जांच के लिए तब सच्चाई सबके सामने रहेगी। वहीं ज्ञात हो कि शासकीय कर्मचारी के द्वारा गोद लेने के नियमों का उल्लंघन करते हुए जमीन अपने नाम से नामांतरण कराई है जबकि भारत सरकार के नियमानुसार गोद लेने के नियम मे एक नियम यभी भी है कि
संभावित माता-पिता और गोद लिए जाने वाले बच्चे के बीच उम्र का फ़ासला कम से कम 25 साल होना ही चाहिए – लेकिन यह नियम उस समय लागू नहीं होता है। जब गोद लेने वाले संभावित माता-पिता रिश्तेदार हों या फिर सौतेले हों – जिन लोगों के पहले से ही तीन या इससे अधिक बच्चे हैं वे लोग बच्चा गोद लेने के लिए योग्य नहीं हैं। शिवपुर चर्चा में नियमों के ठीक विपरीत जाकर गोदनामा कराया गया है। शिकायतकर्ता के द्वारा बताया गया कि एसईसीएल कर्मचारी के द्वारा अपनी जाति से अन्य जाति में जाकर गोद लिया हुआ है मामले की जांच कराए जाने हेतु छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री राजस्व मंत्री व नई दिल्ली प्रधानमंत्री कार्यालय शिकायत पत्र भेजा गया है अब देखना यह है कि कब तक फर्जीवाड़ा गोदनामा का फर्जीवाड़ा मामला परत दर परत खुलता है नियमों के अनुसार गोद लेने के नियमों के विपरीत पाए जाने पर गोदनामा को निरस्त भी किया जा सकता है।
