नामांतरण मात्र 5000 से शुरू बाबु साहब का आदेश
बैकुण्ठपुर जिला कोरिया (नसरीन अशरफी 9926101849 )तहसील कार्यालय बैकुण्ठपुर मे इन दिनो गजब का रवैया चल रहा है, यहां पहुंचने वाले पक्षकारों को एक काम के लिऐ वर्षो चक्कर लगानें को मजबूर होना पड़ता है। आपको बताते चलें कि बैकुंठपुर तहसील कार्यालय में जो फरियादी पक्ष कार सुबह आते हैं अपने पेसी दिनांक मे उन लोगों को लगातार समय पर समय देकर साल 2 साल तक घुमा दिया जाता है, लेकिन भू-माफियाओं के लिए तहसील कार्यालय शाम 6 बजे से खुलता है रात 11-30 बजे तक खुला रहता है, दिन में यहां के कर्मचारी अपनी मनमानी करते नजर आते हैं। तहसील बैकुंठपुर के अधिकारी वहां के कर्मचारियों को लगातार आदेशित करते रहते हैं किंतु कर्मचारी अपने मन से कार्य करते हैं अधिकारी के आदेश को दरकिनार किया जाता है। शहरी क्षेत्र व आसपास के ग्रामीण जो पट्टा विभाजन, फावती व नामांतरण करवाना चाहते हैं वह लोग सुबह से आकर शाम 5:30 बजे शाम तक बैठे रहते हैं लेकिन उनकी फाइल किसी प्रकार से दबा कर रखी जाती है जो लोग पैसे देते हैं उन लोगों का कार्य किया जाता है, तहसील कार्यालय में सैकड़ों मामले लंबित मामले नामांतरण, सीमांकन, फावती, बटवारा व फर्जी रजिस्ट्री के केश लगे है। अधिकारी के द्वारा तो कर्मचारियों को आदेशित किया जाता है कि, समस्त कार्य को समय सीमा मे
निराकरण करें, किंतु जो नीचे बैठे रहते हैं कर्मचारी उनके द्वारा लगातार सुबह, शाम, मंगलवार सोमवार, कल, परसों बोल कर दो से 3 साल मामले को दबा कर रखा जाता है। यदि कोई दक्षिणा दे दिया तो उनका कार्य महज 2 घंटे में ही हो जाता है। तहसील कार्यालय में कार्य किस प्रकार कुछ लिपिक करते हैं इसकी जानकारी भी खुद कलेक्टर कोरिया ने ली थी क्योंकि उनके पास भी कई मामले जा चुके हैं। जिस पर त्वरित कार्यवाही भी हुई और लोगों ने पूर्व कलेक्टर कोरिया को बधाई भी दी। उनमें से एक किसान ने तो पूर्व कलेक्टर कोरिया से आवेदन किया कि वह लगातार 4 वर्षों से सीमांकन के लिए परेशान है जिसका कार्य अब तक नहीं किया जा रहा है इसकी जानकारी मिलते ही पूर्व कलेक्टर कुलदीप शर्मा के द्वारा आदेश करने पर महज 4 घंटे में ही सीमांकन का कार्य पूरा कर लिया गया जो 4 वर्षों में नहीं हो सका था। किसान भी पूर्व कलेक्टर कोरिया को धन्यवाद ज्ञापित किया था। सूत्रों माने तो एक मामला 2018 से तहसील कार्यालय में चल रहा है यहां के लिपिक के पास भी वर्तमान सत्र में यह प्रकरण चल रहा है इस प्रकरण में तहसीलदार बैकुंठपुर के द्वारा दिनांक आगे पिछे हो सकता है, एक अंदाजन 6 अप्रैल 2022 को उक्त प्रकरण में फाइनल डिसीजन तहसीलदार बैकुण्ठपुर के द्वारा दिया गया था।
किंतु फाइनल डिसीजन को टाइप करने में तहसील बैकुण्ठपुर मे पदस्त लिपिक (रीडर) को 3 माह लग गया आदेश टाईप करने में इस दौरान लिपिक को तहसीलदार बैकुण्ठपुर में 20 से 25 बार आदेश दिये की आदेश को जल्दी टाईप कर जमा करों किन्तु लिपि के कानों में जूं तक नहीं रेंगी और लगभग तीन माह बितने के बाद भी आदेश को टाईप कर जमा नहीं किया गया। उक्त लिपिक का तहसील बैकुण्ठपुर से दो बार तबादला भी हो चुका है लेकिन तहसील बैकुण्ठपुर से बाबु साहब का मोह भंग नहीं हो रहा है या यूं भी कह सकते है कि आम आदमियों को गोल गोल घुमानें और भू-माफियाओं का कार्य आधी रात तक कार्य कर झोली भरनें में मजा आ रहे है। इनके रवैये के कारण कुछ कार्य मे ईमानदार, उर्जावान की छबी भी धुमिल होता ती जा रही है। एक प्रक्रण मे शासकीय कर्मचारी जो महिला है वह अपनें कार्य के लिए महिनों से चक्कर लगा लगा कर व शासकीय कार्य से छुट्टी लेकर आ रही है किन्तु अब तक उस कार्य के लिए एक आदेश तक लिपिक के द्वारा नहीं बनाया गया है ता कि उस जमीन का सीमांकन हो सके। हलाकि उक्त लिपिक की शिकायत कई बार पूर्व कलेक्टर कोरिया से की गई है। अब देखना होगा की क्या कार्यवाही होती है।

