
बैकुण्ठपुर। कोरिया जिले के शिक्षा विभाग में कर्मचारियों के कथित संलग्नीकरण (अटैचमेंट) को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। जनदर्शन में दर्ज शिकायत क्रमांक 2010226000772 के निराकरण में जिला शिक्षा विभाग द्वारा दी गई जानकारी और जमीनी स्थिति के बीच विरोधाभास होने का आरोप लगाया जा रहा है। इस मामले ने शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा पत्र क्रमांक 2742, समय-सीमा बैठक 2026-27, दिनांक 08 जून 2026 के माध्यम से कलेक्टर को जानकारी दी गई कि शिक्षा विभाग का कोई भी कर्मचारी किसी अन्य कार्यालय में संलग्न नहीं है। वहीं दूसरी ओर यह दावा किया जा रहा है कि बैकुण्ठपुर तहसील कार्यालय में शिक्षा विभाग के तीन कर्मचारी नियमित रूप से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
यदि शिकायतकर्ता के दावे सही पाए जाते हैं, तो यह प्रश्न उठता है कि जनदर्शन जैसी महत्वपूर्ण जनसमस्या निवारण व्यवस्था में प्रस्तुत शिकायत के संबंध में वास्तविक तथ्यों की जानकारी क्यों नहीं दी गई। शिक्षा विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभाग से जुड़े मामले में इस प्रकार के विरोधाभास को गंभीरता से देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि कलेक्टर रोमिका यादव समय-समय पर अधिकारियों को शिकायतों के त्वरित एवं तथ्यात्मक निराकरण के निर्देश देती रही हैं। प्रशासनिक बैठकों में भी यह स्पष्ट किया गया है कि शिकायतों का समाधान केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित न रहे, बल्कि वास्तविक स्थिति के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। ऐसे में शिकायतकर्ता का आरोप है कि जनदर्शन में प्रस्तुत शिकायत को बिना पर्याप्त परीक्षण के निराकृत करने का प्रयास किया गया।
मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर यह मांग भी उठ रही है कि यदि तहसील कार्यालय में वास्तव में शिक्षा विभाग के कर्मचारी कार्यरत हैं, तो उनकी पदस्थापना, कार्य आवंटन और उपस्थिति संबंधी अभिलेखों की जांच कराई जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा कलेक्टर को भेजी गई जानकारी किन अभिलेखों के आधार पर तैयार की गई थी।
यह मामला केवल शिक्षा विभाग तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और शिकायत निवारण प्रणाली की विश्वसनीयता से भी जुड़ा हुआ है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस प्रकरण में क्या रुख अपनाता है और शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच कर वास्तविक स्थिति को सार्वजनिक करता है या नहीं।
फिलहाल मामले को लेकर चर्चा जारी है और संबंधित पक्षों की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार किया जा रहा है।
