
बैकुण्ठपुर। तहसील कार्यालय बैकुण्ठपुर में शिक्षा विभाग से संलग्न कर्मचारियों की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े होने लगे हैं। जनदर्शन में की गई शिकायतों और प्रशासनिक आदेशों के बावजूद शिक्षा विभाग के तीन कर्मचारियों के पुनः तहसील कार्यालय में संलग्न किए जाने को लेकर आम नागरिकों एवं आवेदकों के बीच असंतोष देखा जा रहा है। वहीं राजस्व प्रकरणों की फाइलें नहीं मिलने तथा अपील संबंधी मामलों के लंबित होने से आवेदकों को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार पिछले वर्ष विभिन्न शिकायतों के बाद शिक्षा विभाग से संलग्न कर्मचारियों को उनके मूल पदस्थापना स्थल पर वापस भेजा गया था। हालांकि कुछ समय बाद इन्हीं कर्मचारियों को फिर से तहसील कार्यालय बैकुण्ठपुर में कार्य के लिए बुला लिया गया। इस बीच कई ऐसे प्रकरण सामने आए हैं जिनकी फाइलें तहसील कार्यालय में उपलब्ध नहीं हैं। विशेष रूप से अपील से जुड़े मामलों में संबंधित दस्तावेजों के नहीं मिलने से आवेदकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार पहले तहसील कार्यालय में कार्यरत रहे एक लिपिक, जो वर्तमान में एसडीएम कार्यालय में रीडर के रूप में पदस्थ हैं, उनके कार्यकाल से संबंधित कई प्रकरणों की फाइलें एसडीएम कार्यालय की आलमारियों में रखी होने की बात कही जा रही है। इससे राजस्व मामलों के अभिलेखों के रखरखाव और जवाबदेही पर भी प्रश्नचिन्ह लग रहे हैं।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जब किसी राजस्व प्रकरण की सुनवाई या जानकारी की आवश्यकता होती है तो संबंधित अभिलेख समय पर उपलब्ध नहीं हो पाते। इससे न केवल न्यायिक और प्रशासनिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, बल्कि आम नागरिकों का समय और संसाधन भी व्यर्थ हो रहा है। कई आवेदकों का आरोप है कि उन्हें अपने मामलों की जानकारी प्राप्त करने के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
इधर, जनदर्शन में भी तहसील कार्यालय में शिक्षा विभाग के संलग्न कर्मचारियों की शिकायत की गई है। शिकायतकर्ताओं ने सवाल उठाया है कि जब राज्य स्तर पर सभी संलग्न शिक्षकों और कर्मचारियों को 30 अप्रैल 2026 तक उनके मूल विद्यालयों और पदस्थापना स्थलों पर लौटाने के निर्देश दिए गए थे, तब बैकुण्ठपुर और सोनहत तहसीलों में कार्यरत शिक्षा विभाग के संलग्न कर्मचारियों को अब तक वापस क्यों नहीं बुलाया गया।
मामले को लेकर यह भी चर्चा है कि अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) द्वारा प्रकरणों की जानकारी के लिए संबंधित कर्मचारियों को बुलाए जाने पर कई बार वे स्वयं उपस्थित होने के बजाय अपना प्रतिनिधि भेज देते हैं। इस स्थिति ने प्रशासनिक जवाबदेही और कार्यप्रणाली पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि यदि जिम्मेदार कर्मचारी स्वयं उपस्थित नहीं होंगे तो प्रकरणों का निराकरण और अभिलेखों की स्थिति स्पष्ट कैसे होगी।
अब निगाहें शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। आमजन यह जानना चाहते हैं कि संलग्न कर्मचारियों की नियुक्ति, प्रकरणों की फाइलों की उपलब्धता तथा प्रशासनिक आदेशों के पालन को लेकर संबंधित अधिकारियों द्वारा क्या कदम उठाए जाते हैं। साथ ही यह भी अपेक्षा की जा रही है कि लंबित प्रकरणों का शीघ्र निराकरण कर आवेदकों को राहत प्रदान की जाए।
