3 Jul 2026, Fri

जंगलों में बेखौफ चल रहा कथित जुए का खेल, कार्यवाही के अभाव पर उठ रहे गंभीर सवाल

एमसीबी। जिले के मनेन्द्रगढ़-चनवारीडांड क्षेत्र के आसपास के जंगलों में कथित रूप से लंबे समय से अवैध जुए के संचालन की चर्चाएं स्थानीय स्तर पर लगातार सामने आ रही हैं। ग्रामीणों का दावा है कि मुकेश, आकाश, टोकरी, बैंजो सहित कुछ अन्य लोगों के नाम इस गतिविधि से जोड़े जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही इस संबंध में किसी सक्षम न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध किया गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रापाखेड़वा, पारसगाड़ी तथा आसपास के जंगलों में हार-जीत पर पैसे लगाकर कथित तौर पर जुआ खिलाया जाता है, जहां बड़ी संख्या में लोग किस्मत आजमाने पहुंचते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इस गतिविधि पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पाने से लोगों के मन में कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि जुए की लत ने कई परिवारों की आर्थिक स्थिति को कमजोर कर दिया है। अनेक लोग अपनी मेहनत की कमाई गंवाकर कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि हारने वाले कुछ खिलाड़ियों को ऊंची ब्याज दरों पर रकम उपलब्ध कराई जाती है, जिससे वे कर्ज के ऐसे चक्र में फंस जाते हैं, जहां से निकलना कठिन हो जाता है। यदि इन आरोपों में सच्चाई है, तो यह केवल कानून का उल्लंघन नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक शोषण का गंभीर मामला भी है।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, इस कथित अवैध कारोबार का सबसे अधिक दुष्प्रभाव युवाओं और उनके परिवारों पर पड़ रहा है। कई परिवारों में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, घरेलू खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है और आर्थिक तनाव के कारण मानसिक परेशानियां भी बढ़ रही हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जुए जैसी प्रवृत्तियां पूरे समाज को खोखला करती हैं और युवाओं के भविष्य को अंधकार की ओर धकेलती हैं।
अब आवश्यकता इस बात की है कि जिला प्रशासन और पुलिस इन शिकायतों का निष्पक्ष एवं गहन सत्यापन कराएं। यदि कहीं भी अवैध जुआ संचालित हो रहा है, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाए। वहीं यदि लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं, तो उनकी भी स्पष्ट जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि अफवाहों पर विराम लगे और जनता का कानून पर विश्वास मजबूत हो सके।

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