7 May 2026, Thu

राज्य का एकलौता जिला कोरिया जो 105 बांस की प्रजातियों को कर रहा संरक्षित


बैकुण्ठपुर– कोरिया जिले का वन मण्डल बैकुण्ठपुर अपने नए नए प्रयोग के लिए हमेशा ही सुर्खियों मे रहा है। वन मण्डल बैकुण्ठपुर के परिक्षेत्र बैकुण्ठपुर के नर्सरी आनंदपुर मे पहले दुर्लभ प्रजातियों के पेड़ पौधों को रोपण करना व बांस से सामान्य जीवन मे उपयोग की वस्तुऐं या फिर लड्डू बना कर पौधे तैयार करने जैसे क ई प्रयोग किए गए है। सबसे अच्छी बात बैकुण्ठपुर परिक्षेत्र मे रही तो वह कि हमेशा नए प्रयोग सफल रहे है। ऐसी ही एक प्रयोग की जानकारी वन परिक्षेत्र बैकुण्ठपुर से मिली है जहां 105 प्रकार के बांस के दुर्लभ प्रजातियों को रोपा गया है।
जिला मुख्यालय बैकुण्ठपुर में 105 अलग-अलग बांस की प्रजाति का संरक्षण एवं पौध तैयार करने छत्तीसगढ़ का पहला बैम्बू सेटम तैयार किया गया है। विश्व भर में बांस की लगभग 380 से अधिक प्रजाति पाई जाती है, बांस को क्लाइमेट व ग्लोबल वार्मिग के लिये उपयोगी माना जाता है, बांस की प्रजाति घास की तरह पतली से लेकर ड्रम की तरह मोटी होती है। इनमें से 105 प्रजातियों को कोरिया वन मंडल के बैकुण्ठपुर वन परिक्षेत्र में गेज नर्सरी पर संरक्षित कर बांसों के पौधे तैयार करने वाला छत्तीसगढ़ का यह पहला बैम्बू सेटम है।
इस बैम्बू सेटम का शुभारंभ अगस्त में हुए वन महोत्सव कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष चरणदास महंत के कर कमलो से हुआ।इस यहां बांस की दुर्लभ व विलुप्त प्रजाति बैम्बू स्टैप को भी संरक्षित किया जा रहा है जो पूरे छ.ग.के कोरिया जिले मे है। विश्व के अनेक प्रकार की बांस की प्रजातियों का संरक्षण करने छत्तीसगढ़ के पूर्व वित्त मंत्री स्व. रामचंद्र सिंहदेव की सोच थी जिन्होंने खुद अपने विदेश दौरे के दौरान वहाँ की बांस के पौधे यहाँ रोप कर बांस संरक्षण की शुरुआत की थी। अब कोरिया कुमार के नाम से इस योजना को आगे बढ़ाते हुए बैकुण्ठपुर वनमण्डल में जिला मुख्यालय स्थित गेज नर्सरी में 105 प्रजातियों के बांस का संग्रहण और संरक्षण के साथ साथ पौध तैयार करने व वनों में लगाने का कार्य इस सोच के साथ किया जा रहा है कि कई मामले में लोहे और प्लास्टिक के विकल्प के रूप में बांस की उपयोगिता सुनिश्चित की जा सके। वही बैकुण्ठपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत आनन्दपुर नर्सरी में बाल्टी बांस (जो मूलतः भूटान में पाया जाता है)के चार पौधों को विशेष देख रेख के साथ तैयार किया जा रहा है।
आनन्दपुर नर्सरी में तैयार किया जा रहा बाल्टी बांस
आनन्दपुर रोपणी केंद्र के प्रभारी रामकुमार तिवारी ने जानकारी देते हुए बताया कि बाल्टी बांस जो कि भूटान की बांस प्रजाति है इसके चार पौधों को नर्सरी में तैयार किया जा रहा है बड़ा होने पर इस बांस की मोटाई बाल्टी के बराबर तक होता है. 11 हेक्टर में बने आनन्दपुर नर्सरी में विभिन्न प्रकार के पौधे प्रत्येक वर्ष तैयार किये जाते है इसके अलावा नर्सरी में ही वर्मी कम्पोस्ट भी बनाया जा रहा है जो पौधों के लिए खाद के रूप में बहुत उपयोगी है।

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