11 May 2026, Mon

राम मंदिर पर अगले माह आ सकता है सुप्रीम कोर्ट का फैसला, रामकथा कुंज प्रॉजेक्‍ट में आई तेजी

वीएन दास, अयोध्या
राम मंदिर-बाबरी मस्जिद केस के फैसले की तारीख करीब आने के साथ ही विश्‍व हिंदू परिषद मंदिर की तैयारी की रणनीति पर मंथन कर रहा है। वीएचपी के दिवंगत नेता अशोक सिंघल ने अधिग्रहीत 67 एकड़ भूमि पर राम कथा के प्रसंगों का मूर्तियों के जरिए पर चित्रण करने का प्लान तैयार करवाया था जिसे का नाम दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के जल्‍द आने की उम्‍मीद को देखते हुए अब राम कथा कुंज का काम तेज कर द‍िया गया है।

राम कथा कुंज योजना पर 6 साल पहले मंदिर कार्यशाला के पास रामसेवकपुरम में काम शुरू किया गया था। असम के मूर्तिकार रंजीत मंडल को रामायण के प्रसंगों का मूर्तियों के जरिए सजीव चित्रण शुरू करने की जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन जमीन अधिग्रहण के बाद वापसी में लंबा समय लगने के कारण काम धीमी गति से ही चलता रहा। अब मंदिर पर फैसले के जल्‍द आने की उम्मीद से इस पर काम तेज करने को कहा गया है। मंडल के मुताबिक सहयोगी के तौर पर उनके पिता राम कृष्ण मंडल को भी शामिल किया गया है। एमएफए की पढ़ाई करने वाले रंजीत अपनी मूर्ति कला के लिए कई संस्थाओं से सम्मानित हो चुके हैं।

6 साल में बनाए 40 रामायण के दृश्‍य
रंजीत ने बताया कि 40 स्क्रिप्ट की मूर्तियां वे बना चुके हैं। पहले रोजाना एक-दो मूर्तियां बनाते थे। अब मंदिर पर कोर्ट का फैसला अगले माह आने वाला है तो निर्देश मिला है कि काम को तेजी से पूरा किया जाए। उन्‍होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो और ज्यादा कारीगरों को लगाया जाएगा। रंजीत ने बताया कि कुल 100 स्क्रिप्ट तैयार करना है। पूरी रामकथा को 100 सीन में समेटना है।

जानें, क्या है रामकथा कुंज
अधिग्रहीत राम जन्मभूमि परिसर में विवादित स्थल को छोड़कर बाकी इलाके में राम कथा के दृष्‍यों का सजीव चित्रण लाइब्रेरी झांकी और चित्रों से सजाकर रामायण काल का सीन तैयार करने योजना है। ढांचा गिराए जाने के बाद यह योजना अधर में लटक गई थी। अशोक सिंघल ने 1997 में इसी उम्मीद से यह योजना रामसेवकपुरम में वर्कशॉप बनवाकर शुरू की थी। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद अगर अधिग्रहीत जमीन वीएचपी को वापस मिलेगी तो राम कथा कुंज की योजना को साकार किया जाएगा। सिंघल के निधन के बाद अब इस योजना का निर्देशन वीएचपी के नेता चंपत राय कर रहें हैं। रंजीत मंडल ने बताया अब तेजी से काम पूरा होगा।

रंजीत ने बताया कि वह प्रभु राम की सेवा में लगे हैं। उन्‍होंने कहा, ‘मुझे पिछले सालों में कई अच्छे जॉब ऑफर हुए लेकिन उन्‍हें नकार दिया। मंशा रही कि राम काज छोड़कर कहीं नहीं जाना है। पिता भी इस सेवा में जुड़ गए हैं। पत्नी और दो बच्चों के लिए यही बसेरा बना लिया है।’ उन्‍होंने बताया कि वीएचपी से हर माह 12 हजार मुझे और 10 हजार रुपये मेरे पिता को तथा 3 हजार रुपये लेबर को पारिश्रमिक मिलता है।

Source: Uttarpradesh Feed By RSS

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