10 May 2026, Sun

सूर्य के दूसरे अर्घ्य पर ध्यान रखें 4 बातें, जानें छठ के प्रसाद की महिमा

 
नई दिल्ली 

पहला अर्घ्य षष्ठी तिथि को शाम को दिया जाता है. यह अर्घ्य अस्त होते हुई सूर्य को देते हैं. इसमें अर्घ्य दूध और जल से दिया जाता है. अंतिम अर्घ्य सप्तम तिथि को उगते हुये सूर्य को अरुण वेला में देते हैं. इस अर्घ्य को देने के बाद ही व्रती व्रत का समापन करते हैं. व्रत का समापन कच्चा दूध और प्रसाद ग्रहण करके होता है.

छठ के प्रसाद की महिमा

– छठ के अर्घ्य के समय घाट पर जाना और व्रती के चरण छूकर आशीर्वाद लेने की विशेष मान्यता है

– व्रती के हाथों से प्रसाद भी ग्रहण करना बहुत शुभ माना जाता है

– माना जाता है कि अर्घ्य देते समय सूर्य का दर्शन और फिर छठ का प्रसाद ग्रहण करना, जीवन की तमाम समस्याओं को दूर कर देता है

– मान्यता है कि मात्र इस प्रसाद को भक्ति भाव से ग्रहण करने से निःसंतान लोगों को संतान की प्राप्ति होती है और स्वास्थ्य की गंभीर से गंभीर समस्या दूर हो जाती है

क्या विशेष करें इस दिन

– छठ के अंतिम अर्घ्य के दिन यानी सप्तमी तिथि को सूर्य को अर्घ्य जरूर दें

– इस दिन फल, दूध और मीठी वस्तुएं लोगों को खिलाएं या दान दें

– सम्भव हो तो अर्घ्य के बाद भगवान सूर्य के मन्त्रों का जाप करें

– मंत्र जाप के बाद अपनी मनोकामना कहें

Source: National

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *