
परेश ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, ‘प्रफेसर के खिलाफ किए गए प्रोटेस्ट को देखकर दंग रह गया। भाषा का किसी धर्म से क्या ताल्लुक है? विडंबना यह है कि प्रफेसर फिरोज ने अपना मास्टर्स और पीएचडी संस्कृत में की है। भगवान के लिए यह मूर्खता बंद करें।’
इसके बाद परेश ने एक और ट्विट कर कहा, ‘इसी लॉजिक से तो महान गायक मरहूम श्री मोहम्मद रफी जी को को भजन नहीं गाने चाहिए थे और नौशाद साहब को इनका म्यूजिक नहीं देना चाहिए था।’
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