
कक्ष क्र.942 पर बोर खनन,ईंट निर्माण और पेड़ों पर गाडलिंग विभाग की मिलीभगत तो नहीं,??
कोरिया केल्हारी – माना की जंगल अब राजनीतिक रोटी सेकने का चूल्हा बन चुका है पर पहरेदारों को किसने इजाजत दे दी इसे लुटाने की,,जनाब जरा मनेंद्रगढ़ वन मंडल के केल्हारी रेंज तो जाइए और देखिए हर रोज दिन पर दिन, कटते युवा तैयार वृक्षों की बलि,कक्ष क्र 942 और मुख्य मार्ग के किनारे पर नई झोपड़ी हाल ही में बनाई गई है।एक परिवार जो काफी पहले यहां पर बसा था जिसे उसके अधिकार और जीवकोपार्जन के लिए एक वन भूमि का टुकड़ा दिया गया था।और जिस परिवार के मुखिया के मृत्यु पश्चात उस जमीन पर अन्यत्र से उसके कई रिश्तेदार यहां पर आ गए और आबंटित भूमि के अलावा काफी बड़े पैमाने पर अतिरिक्त वन भूमि पर अतिक्रमण करते चले जा रहे हैं।3-4 साल पहले वन विभाग की टीम द्वारा इस परिवार की आबंटित भूमि को नापकर चिन्हांकित करके दे दिया गया था।और वहीं पर मौजूद वन विभाग की सी पी टी के दूसरे ओर की भूमि को सुरक्षित रखा गया था।
बीते एक वर्षों में वन भूमि पर अतिक्रमण बढ़ा,,
बीते एक वर्ष के दौरान उस परिवार द्वारा उक्त प्रतिबंधित भूमि व सी पी टी दोनों को पार करके दूसरी ओर निजी बोर करा लिया गया।मौके पर एक बाड़ी भी बना ली गई।अवैध ईंट का निर्माण भी शुरू कर दिया गया है।और आसपास के नीलगिरी के प्लांटेशन में तैयार युवा पेड़ों की गाडलिंग करता जा रहा है।साथ ही ईंट जलाने के लिए और अतिक्रमण का दायरा बढ़ाने के लिए आसपास की संरक्षित वन भूमि पर तैयार साल के छोटे बड़े वृक्षों पर आगजनी कर कटाई भी की जा रही है।
तैयार प्लांटेशन को नहीं बचा पा रहा मनेंद्रगढ़ वन मंडल

कक्ष क्र 942 का 200 हेक्टेयर से भी ज्यादा का रकबा जिस पर कई बार अलग अलग मदों से विभाग प्लांटेशन कराता रहा है।और उन्हें सुरक्षित भी रखा जाता रहा है किंतु बीते करीब एक डेढ़ वर्षों के दौरान में केल्हारी के लगभग तैयार हो चुके कीमती प्लांटेशन के युवा पेड़ों और तैयार पौधों की बरबादी हुई है।वन विभाग के जिम्मेदारों की उदासीनता और लापरवाही का ये आलम ब्याप्त होता चला आया है कि प्लांटेशन के पौधों को झांकी और रवई के उपयोग के लिए तो काट कर लेजा रहे हैं साथ ही उन्हें तोड़कर या काटकर भी समय से पहले ही नष्ट करते जा रहे हैं उक्त अतिक्रमण स्थल के आसपास वर्ष 2015 में सागौन,आवंला और नीलगिरी के मिश्रित प्लांटेशन किए गए थे।जिस प्लांटेशन के पौधों को भी आसपास की आबादी जोरदार क्षति पहुंचा चुकी है।आपको बता दें कि और कुछ वर्षों तक विभाग में इसी तरह की लापरवाही का दौर व्याप्त रहा तो केल्हारी वन परिक्षेत्र के एक दशक पुराने प्लांटेशन के एक भी पेड़ जीवित नहीं बचेंगे।
