लाखों खर्च हो गए,,बारिश भी हुई,पर पानी का एक बूंद भी नहीं जमा कर सका वन विभाग का नरवा
कोरिया – मनेंद्रगढ़ वन मंडल का केल्हारी वन परिक्षेत्र जहां के डीहुली ग्राम पंचायत अंतर्गत आश्रित ग्राम बिलौरी डांड में एक वर्ष पूर्व करीब 25 लाख रुपए की लागत से वन विभाग द्वारा एक छोटा तालाब बनाया गया था।तालाब बनाने में सही तकनीक और उचित मापदंडों का उपयोग नहीं किया गया था।करीब 70मीटर के मेड की लंबाई वाले इस तालाब में बेस या फिर अर्थ वर्क न करके निर्माण को बुनियादी तौर पर कमजोर कर दिया गया था। तालाब के मेड़ों में मिट्टी भी डाली गई थी पर उस मिट्टी को पूरी तरह बैठाया नहीं गया था।सामान्यतः मिट्टी डालते हुए एक नाले नुमा गड्ढे के एक छोर पर मेढ़ बनाकर तैयार कर दिया गया था तालाब।आपको बता दें कि वन विभाग किसी भी एंगल से निर्माण कार्य कराने की कोई दक्षता नहीं रखता और ना ही इनके अधिकारी कर्मचारियों को बड़े बड़े निर्माण कार्यों को कराने की सूझबूझ या तकनीकी ज्ञान होता है।जिस बात पर थोड़ा सा नियमों का पालन करते हुए वन विभाग कुछ वर्षों से जुगाड़ वाले डिग्रीधारी तकनीकी ज्ञाता भी अपने इन गोरख धंधों में शामिल कर चुका है। जिनकी भूमिका सिर्फ इतनी होती है कि वो अपना चिड़िया बैठाकर विवाद का रास्ता साफ कर दे जिससे साबित हो जाए कि तकनीकी नियमों और उसके देखरेख में निर्माण कराया गया है।परंतु जब बात किए गए कार्यों के परफार्मेंस की आती है तो यहीं पर लीपापोती दम तोड़ देती है।और फिर या तो इसे अति वृष्टि से जोड़ दिया जाता है या फिर प्राकृतिक आपदा से छति दिखा दिया जाता है।बात केल्हारी वन परिक्षेत्र के जिस तालाब की हो रही है उसके निर्माण की बात करें तो करीब एक डेढ़ साल पहले बने इस तालाब के मेड़ों की मिट्टी तीन जगह से तालाब को तोड़कर बह चुकी थी।जिसकी सिर्फ एक वज़ह नहीं थी।पर मौके का मुआयना और स्थानीय लोगों से पूछताछ के बाद एक बड़ी तकनीकी कमी उजागर हुई और वो ये थी कि ओवर फ्लो के लिए जो एक किस्म का वेस्ट वियर बनाया जाता है उसे नहीं बनाया गया था।इसलिए बारिश का पानी तालाब के मेढ़ को तीन जगह से तोड़ दिया था।हालांकि तालाब की मेड़ टूटने की घटना बाद तुरंत ही युद्दस्तर पर मिट्टी और पत्थर डाल कर उसकी मरम्मत करा दी गई थी।और आनन फानन में जुगाड़ू वेस्ट वियर भी खोद दिया गया था।जिस बावत विभाग द्वारा फिर से बतौर मरम्मत पैसे का ब्यय भी दिखाया गया। पर अब ये बात सामने आती है कि वन परिक्षेत्र केल्हारी निर्माण कार्यों में ऐसी लापरवाही हमेशा क्यू करता है।हाल ही में कराए गए दूसरे कार्य और छत्तीसगढ़ सरकार की नरवा विकास योजना की बात करें तो केल्हारी वन परिक्षेत्र इस योजना को भी मट्टी पलीत करने का एक कसर नहीं छोड़ रहा है।बड़ी लागत राशि को बीहड़ों में इस कदर बर्बाद किया है कि पूरी बरसात के बाद भी एक बूंद पानी का जमा नहीं कर पाया इनका नरवा बांध।
बहरहाल नरवा निर्माण कार्यों में मनेंद्रगढ़ वन मंडल के डी एफ ओ की उदासीनता भी सामने देखी जा रही है।राज्य सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना का अपने कार्य क्षेत्र में सही सुपरविजन न करना और योजना के उद्देश्यों से उलट हुए कार्यों को अवगत कराने के बाद भी मौके की जांच पर आनाकानी किया जाना दायित्व निर्वहन में बड़ी चूक का सबब साबित हो रहा है।जिसके मद्देनजर राज्य के भूपेश सरकार की नरवा जैसी जल जमीन और पर्यावरण को सुगम सुरक्षित और संरक्षित करने की योजनाओं की पहल पर ग्रहण लगता दिखाई दे रहा है।
