17 Jul 2026, Fri

तहसील कार्यालय में शिक्षा विभाग के कर्मचारियों से न्यायालयीन कार्य, गोपनीयता पर उठे सवाल

बैकुण्ठपुर। तहसील कार्यालय बैकुण्ठपुर में शिक्षा विभाग के कर्मचारियों को संलग्न कर उनसे न्यायालयीन एवं आवेदनों से संबंधित कार्य कराए जाने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। इस व्यवस्था को लेकर कई आवेदकों एवं नागरिकों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि राजस्व न्यायालय से जुड़े मामलों में गोपनीय दस्तावेज, नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन तथा अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं की संवेदनशील जानकारी होती है, ऐसे में बाहरी विभागों के कर्मचारियों से ऐसे कार्य कराना उचित नहीं माना जा सकता।
जानकारी के अनुसार, तहसील कार्यालय में शिक्षा विभाग के कुछ कर्मचारी लंबे समय से संलग्न हैं और विभिन्न प्रशासनिक कार्यों में उनकी भूमिका बनी हुई है। आरोप है कि इनमें से कुछ कर्मचारी आवेदनों की प्रक्रिया, दस्तावेजों के संधारण तथा न्यायालयीन प्रकृति के कार्यों में भी शामिल हैं। इसे लेकर लोगों का कहना है कि इस प्रकार की व्यवस्था से गोपनीयता एवं निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।
मामले को लेकर यह भी चर्चा है कि तहसील कार्यालय में रिश्तेदारी आधारित प्रभाव देखने को मिल रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्यालय में “चाचा-भतीजा” व्यवस्था हावी है, जिसके कारण नियमों के बजाय व्यक्तिगत प्रभाव अधिक दिखाई देता है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार उठ रहे सवालों ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर बहस छेड़ दी है।
उल्लेखनीय है कि बैकुण्ठपुर तहसील में इसी प्रकार का मामला पिछले वर्ष भी सामने आया था। उस समय समाचार प्रकाशित होने के बाद संबंधित संलग्न कर्मचारियों को उनके मूल विभाग में वापस भेजे जाने की कार्रवाई की गई थी। लेकिन आरोप है कि बाद में उन्हें पुनः एसआईआर (Special Intensive Revision) कार्य के नाम पर तहसील कार्यालय में संलग्न कर लिया गया और वर्तमान में भी उनकी सेवाएं ली जा रही हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि किसी विशेष कार्य के लिए कर्मचारियों की आवश्यकता है तो उसके लिए स्पष्ट आदेश, अवधि और कार्य की सीमा निर्धारित होनी चाहिए। वहीं न्यायालयीन एवं राजस्व मामलों में केवल अधिकृत कर्मचारियों की ही तैनाती की जानी चाहिए ताकि गोपनीयता और पारदर्शिता बनी रहे। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और राजस्व विभाग इस मामले को किस प्रकार संज्ञान में लेते हैं। यदि आरोपों में तथ्य पाए जाते हैं तो प्रशासन को नियमों के अनुरूप व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी, जिससे आम नागरिकों का विश्वास प्रशासनिक तंत्र पर बना रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *