1 Jun 2026, Mon

वन विभाग में जवाबदेही का दौर शुरू : केदार कश्यप ने लंबित विभागीय जांचों पर दिखाई सख्ती

तीन माह में पुराने जांच प्रकरणों के निराकरण के निर्देश, देरी करने वाले अधिकारियों पर होगी कार्रवाई – केदार कश्यप

सुशासन की दिशा में बड़ा कदम : वर्षों से लंबित मामलों की होगी समीक्षा, जवाबदेह तय होंगे अधिकारी

न्याय में देरी, कर्मचारियों के साथ अन्याय” — समयबद्ध निर्णय, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर

रायपुर। वन मंत्री केदार कश्यप ने वन विभाग में वर्षों से लंबित विभागीय जांच प्रकरणों को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए आगामी तीन माह के भीतर सभी पुराने मामलों का अनिवार्य रूप से निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि निर्धारित अवधि के बाद यदि पुराने प्रकरण असामान्य अथवा अत्यधिक विलंब से प्रस्तुत किए जाते हैं, तो संबंधित जांचकर्ता एवं प्रस्तुतकर्ता अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में अपर मुख्य सचिव, वन विभाग को विस्तृत निर्देश जारी किए गए हैं।

वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि विभागीय जांच मामलों में अनावश्यक देरी प्रशासनिक कार्यप्रणाली को कमजोर करती है और कर्मचारियों को वर्षों तक मानसिक, सामाजिक तथा सेवा संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। शासन व्यवस्था में निर्णयहीनता और अनावश्यक विलंब के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए।

मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि अनेक मामलों में विभागीय जांच प्रस्ताव 4 से 5 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद प्रस्तुत किए जाते हैं, जबकि कुछ प्रकरण संबंधित अधिकारी अथवा कर्मचारी के सेवानिवृत्त होने के बाद भेजे जाते हैं। यह स्थिति सुशासन, जवाबदेही और संवेदनशील प्रशासन की भावना के विपरीत है।

उन्होंने कहा कि लंबे समय तक प्रकरण लंबित रहने से अभिलेखों और साक्ष्यों के परीक्षण में कठिनाई आती है तथा विभागीय कार्यवाही की गंभीरता और प्रभावशीलता भी प्रभावित होती है। कई कर्मचारी वर्षों तक बिना किसी निर्णय के अनिश्चितता की स्थिति में कार्य करने को विवश रहते हैं, जिससे उनके सेवा हित, पदोन्नति, पेंशन और व्यक्तिगत जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

वन मंत्री ने कहा कि यदि कोई कर्मचारी दोषी है तो उसके विरुद्ध समय पर कार्रवाई होनी चाहिए और यदि वह निर्दोष है तो उसे अनावश्यक उत्पीड़न एवं अनिश्चितता से शीघ्र राहत मिलनी चाहिए। न्याय में विलंब, न्याय से वंचित करने के समान है।

उन्होंने निर्देश दिए हैं कि एक माह के भीतर विभाग में पूर्व से लंबित सभी विभागीय जांच प्रकरणों की जानकारी संकलित की जाए तथा सभी मामलों का प्राथमिकता के आधार पर परीक्षण कर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

केदार कश्यप ने कहा कि जवाबदेही तय किए बिना प्रशासनिक सुधार संभव नहीं है। विभागीय कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, समयबद्ध निर्णय और उत्तरदायित्व सुनिश्चित करना सुशासन की मूल आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार पारदर्शी, संवेदनशील और जवाबदेह प्रशासन की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सुशासन, समयबद्ध निर्णय और जवाबदेह कार्यसंस्कृति पर दिए जा रहे विशेष बल के अनुरूप वन विभाग में भी प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणाममुखी बनाया जा रहा है।

वन मंत्री कश्यप ने कहा कि शासन का उद्देश्य केवल अनुशासनात्मक कार्रवाई करना नहीं, बल्कि ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित करना है जिसमें कर्मचारियों को समय पर न्याय मिले, निर्णय प्रक्रिया पारदर्शी हो और जवाबदेही स्पष्ट रूप से तय हो।

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